swati_maliwalनयी दिल्ली, निर्भया बलात्कार कांड के नाबालिग दोषी की रिहाई पर रोक लगाने संबंधी दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की याचिका की सुनवाई उच्चतम न्यायालय सोमवार को करेगा।

डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने अवकाशकालीन खंडपीठ के न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल के कुषक रोड स्थित आवास के बाहर मध्यरात्रि को संवाददाताओं को बताया कि उनकी याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है और इसे सोमवार को सुने जाने वाले मामलों में तीसरे नम्बर पर सूचीबद्ध किया जा चुका है।

यह पूछे जाने पर कि क्या न्यायमूर्ति गोयल ने रिहाई पर रोक लगाने के बारे में कुछ कहा है, इस पर कोई स्पष्ट जवाब दिये बिना सुश्री मालीवाल ने कहा कि चूंकि यह मामला न्यायालय के विचाराधीन है, इसलिए अब दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस का फर्ज बनता है कि वे कम से कम सोमवार तक उसकी रिहाई न करे।

गौरतलब है कि निर्भया सामूहिक बलात्कार कांड का नाबालिग दोषी तीन साल तक बाल सुधार गृह में रहने के बाद रविवार को रिहा होने वाला है, लेकिन कल देर शाम से उसकी रिहाई पर रोक लगाये जाने की कवायद शुरू हुई थी। सुश्री मालीवाल ने अपने वकीलों और सहयोगियों के साथ मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर के सरकारी आवास का रुख किया था।

उसके बाद वह उच्चतम न्यायालय परिसर गई थीं, जहां रजिस्ट्रार ने उनकी याचिका की जांच की थी। बाद में संबंधित रजिस्ट्रार याचिका लेकर न्यायमूर्ति गोयल के आवास गए थे, उनके पीछे-पीछे सुश्री मालीवाल भी अपने दल-बल के साथ वहां गईं।

सुश्री मालीवाल के अनुसार, रजिस्ट्रार के साथ विचार विमर्श के बाद न्यायमूर्ति गोयल ने इसकी सुनवाई के लिए सोमवार की तारीख मुकर्रर की। उस दिन की सूची में इसे तीसरा नम्बर दिया गय है। अवकाशकालीन खंडपीठ के दूसरे न्यायाधीश हैं- न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित।

गौरतलब है कि 16 दिसम्बर 2012 को राजधानी में एक पैरा मेडिकल छात्रा के साथ चलती बस में सामूहिक बलात्कार किया गया था। नाबालिग सहित छह दरिंदों ने न केवल उसकी अस्मत लूटी थी बल्कि उसे मरणासन्न स्थिति में सड़क पर फेेंक दिया था। पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर के एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गयी थी।

मामले के छह आरोपियों में से एक ने जेल में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, जबकि चार अन्य को फांसी की सजा सुनाई गई है, जिसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील लंबित है। छठा आरोपी उस वक्त 18 वर्ष से कम उम्र का था, इसलिए उसके खिलाफ मुकदमा किशोर न्याय बोर्ड (जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड) में चला था, जिसने उसे दोषी ठहराते हुए तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया था। यह अवधि आज पूरी हो रही है।

Related Posts: