नयी दिल्ली,

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने उत्पादों की गुणवत्ता पर जोर देेते हुए आज कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों और सेवाओं की मांग बढ़ाने के लिए इनकी लागत घटाना आवश्यक है।

श्री प्रभु ने यहां ‘58 वें राष्ट्रीय लागत सम्मेलन 2018’ को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को अगले सात साल में पांच हजार अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने की तैयारी शुरु कर दी है। इसमें चार्टर्ड एकाउंटेंट, कॉस्ट एकाउंटेंट और कंपनी सेकेट्री की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। दो दिवसीय इस सम्मेलन का अायोजन ‘द इंस्टीटयूट आॅफ कॉस्ट एकाउंटेंटस् आॅफ इंडिया’ ने किया है।

उन्होेंने चीन की अर्थव्यवस्था के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें कम लागत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों और सेवाओं को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लागत घटाने पर जाेर देना हाेगा। उन्हाेंने कहा कि लागत घटाने के लिये गुणवत्ता के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए बल्कि लागत कम करने के लिये नवाचार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक तैयारी का सहारा लेना चाहिए।

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि सरकार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों और सेवाओं की मांग बढ़ाने के लिए आक्रामक तरीके से काम कर रही है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सफल होने के लिये प्रतिस्पर्धी कीमत और उच्च गुणवता जरुरी है। भारतीय विशेषज्ञों को इसी तथ्य को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए।

Related Posts: