हरीश दुबे
ग्वालियर,

ग्वालियर -चंबल अंचल एक लंबे समय तक दस्यु समस्या से प्रभावित रहा है. इस कारण यह अंचल विकास की दौड़ में पिछड़ गया.

वर्तमान व पिछली सरकारेँ इस अँचल के विकास को अपनी वरीयता पर रखने का दावा तो करतीं रही हैं लेकिन सच्चाई इससे कोसों दूर है. यदि केंद्र व राज्य सरकार वाकई में इस अंचल के विकास के प्रति गंभीर होती तो नीति आयोग द्वारा जारी देश के 101 पिछड़े जिलों की सूची मैं इस इलाके के श्योपुर, भिण्ड, मुरैना एवं दतिया जिलों मैं से किसी को तो उक्त सूची में स्थान मिलता.

खेदजनक पहलू यह है कि श्योपुर-मुरैना एवं भिण्ड-दतिया मैं न सिर्फ भाजपा के सांसद हैं बल्कि इन्हीं जिलों से तीन ताकतवर मंत्री भी हैं लेकिन वे अपने एक भी जिले को नीति आयोग द्वारा चिन्हित 101 पिछड़े जिलों की सूची में स्थान नहीं दिला पाए.

मुरैना एवं भिण्ड जिलों को पिछड़ा जिला की लिस्ट में न रखने की वजह दोनों ही जिलों में औद्योगिक परिक्षेत्र का होना है. स्व. माधव राव सिंधिया ने 35 वर्ष पूर्व मुरैना के बानमोर एवं भिण्ड के मालनपुर मैं औद्योगिक परिक्षेत्र स्थापित कराए थे.

उस समय इन जिलों के औद्योगिक विकास का खूब ढिंढोरा पीटा गया. स्व. सिंधिया ने तो देश भर के बड़े उधोग घरानों को यहां लाकर बागी समस्या झेल रहे इन चिर-उपेक्षित जिलों के कैनवास पर विकास के स्वर्णिम रंग भरने की भरसक कोशिश की लेकिन बड़े उद्योग समूहों ने बानमोर एवं मालनपुर में कारखाने तो लगा दिए लेकिन इन्हें सुचारु रूप से चलाने मैं खास रूचि नहीं दिखाई. आज जमीनी हकीकत यह है कि दोनों औद्योगिक क्षेत्रों में कुछ ही कारखाने चालू हैं, बाकी बंद हो गए.

हालांकि दतिया जिले को विकास की पटरी पर लाने के लिए जनसंपर्क मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने काफी प्रयास किए हैं लेकिन इसके नतीजे आने में अभी वक्त लगेगा. हालांकि नीति आयोग की सूची में इस संभाग के गुना जिले को शामिल किया गया है लेकिन इतने मात्र से काम नहीं चलेगा. इस अंचल के श्योपुर, दतिया एवं भिण्ड में से कम से कम दो जिलों को नीति आयोग द्वारा चिन्हित पिछड़े जिलों की सूची में शामिल करना आवश्यक है, तभी इस सूची की सार्थकता होगी.

मैं श्योपुर को मप्र का सबसे पिछड़ा जिला मानता हंू. कान्ग्रेस ने यहां विकास के काफी प्रयत्न किए लेकिन विगत 15 वर्षों में श्योपुर को विकास के पथ पर काफी पीछे धकेल दिया है. मेरी मांग है कि श्योपुर को पिछड़े जिलों की सूची में शामिल किया जाए.
– रामनिवास रावत
पूर्व मंत्री, मप्र शासन

नीति आयोग की सूची में श्योपुर, मुरैना एवं दतिया जैसे जिलों को शामिल किया ही जाना चाहिए, मैं इस संबंध में सीएम से बात करूंगा.
-बाबूलाल मेवरा
पूर्व विधायक, विजयपुर

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