सुभाष चन्द्र बोस के प्रपौत्र चंद्रकुमार बोस ने नेताजी के जीवन पर डाला प्रकाश

नवभारत न्यूज भोपाल,

सुभाषचन्द्र बोस ने अपने प्रारंभिक जीवन से ही आरामदायक जीवन के स्थान पर संघर्ष को ही चुना, उनके पिताजी ने उन्हें कैंब्रिज विश्वविद्यालय पढऩे के लिए भेजा. वह चाहते तो अपनी डिग्री के बूते पर अच्छी नोकरी पा सकते थे, पर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बनने का निश्चय किया. नेताजी के विषय में कहे गए यह शब्द किसी ओर के नहीं बल्कि उन्ही के प्रपौत्र चन्द्रकुमार बोस के हैं.

कार्यक्रम में अतिथि वक्ता के रूप में पूर्व सैनिक मेजर जनरल जी.डी. बक्शी, नेताजी के जीवन पर शोध कर रहे पत्रकार अनुज धर सहित सुभाष चन्द्र बोस के प्रपौत्र चन्द्रकुमार बोस उपस्थित थे. चन्द्रकुमार बोस ने नेताजी के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपना व्याख्यान दिया.

देश के नागरिकों को बताया गया झूठा इतिहास

रक्षा विशेषज्ञ जी.डी बक्शी ने अपने व्याख्यान में कहा कि पिछले 70 वर्षों से इस देश के लोगों को झूठा इतिहास लगाया गया है कि आज़ादी सिर्फ अहिंसा और महात्मा गांधी द्वारा किये गए आंदोलनों से मिली है.

जी.डी बक्शी ने कहा की सुभाषचन्द बोस ने ही सेना के जवानों को विद्रोह के लिए प्रेरित किया और सैन्य विद्रोह के डर से ही ब्रिटिश सरकार को देश छोडऩा पड़ा. अंतिम व्याख्यान अनुज धर का था जिसमें उन्होंने सुभाषचन्द्र बोस के रहस्यमयी ढंग से गुम हो जाने के विषय में उनके द्वारा किये गए शोध के द्वारा विभिन्न पहलुओं से पर्दा उठाने का प्रयास किया.

“कांग्रेसी इतिहासकारों ने स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में बोस को उतना श्रेय नही दिया जितना दिया जाना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास नए सिरे से लिखा जाना जरूरी है.”
-मेजर जनरल जी.डी. बक्शी

“यह मेरा ओर भोपाल के सभी लोगों के लिए सौभाग्य की बात है कि इस आयोजन के जरिये नेताजी के जीवन से जुड़ी आवश्यक बातें जानने को मिलीं.”
-एस. के. यादव दर्शक

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