प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को इस बात के लिये कोटिश: धन्यवाद कि उन्होंने यह फैसला लिया है कि वे नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के रहस्यमय ढंग से लापता होने के बारे में केन्द्र सरकार के पास जो गोपनीय वर्गीकृत फाइलें हैं उनसे सम्पूर्ण राष्टï्र-विश्व को अवगत कराया जाए. इस सिलसिले में वे नेताजी के कई परिवारजन से मिलते जा रहे हैं और अब उन्होंने पूरे परिवार को एक साथ वार्ता व निर्णय करने के लिये आमंत्रित किया है और यह बैठक शीघ्र ही होने जा रही है.

ये मामला पूरे राष्टï्र का है, लेकिन इसमें उनके परिवार की इच्छा व सहमति भी उतनी महत्वपूर्ण है. अब नेताजी की पुत्री अनीता जो जर्मनी में रहती हैं, उन्होंने भी यह मांग की है कि सरकार उसके पास जो भी फाइलें हैं और ब्रिटेन, रूस, जर्मनी आदि भी किसी देश जहां कोई जानकारी है उसे प्राप्त कर नेताजी के मामले में सभी कुछ जाहिर कर इस मामले को हमेशा के लिए बन्द कर दिया जाए.

इस मामले में मोदीजी से पहले सभी प्रधानमंत्रियों का रवैया बड़ा विचित्र रहा. अब तक नेताजी के लापता होने के बारे में जांच के लिये तीन कमीशन (1) शाहनवाज कमीशन (2) जस्टिस जी.डी. खोसला कमीशन और (3) जस्टिस मुखर्जी कमीशन बिठाये गये. इनको रिफरेन्स भी यही दिया गया कि नेताजी के बारे में पता करो और दूसरी ओर सरकार ने अपने द्वारा ही गठित कमीशन को वे फाइलें नहीं दीं जिन्हें अब तक इस दृष्टिï से गोपनीय कहा व रखा जा रहा है कि उनमें उल्लेखित जानकारी से हमारे किसी ‘देश विशेषÓ से संबंध खराब हो जायेंगे. ये देश विशेष जापान के अलावा संभवत: और कोई नहीं हो सकता.

अभी तक जापान की ओर से ही अधिकृत रूप में यह कहा गया है कि नेताजी की मृत्यु फारमोसा (अब इसे ताईवान कहा जाता है) के ताईहोकू हवाई अड्डïे पर प्लेन क्रेश में हुई थी. वहीं उनका अंतिम संस्कार कर उनकी अस्थियां टोकियो के रंकोजी बौद्ध मंदिर में रख दी गयी हैं. उस समय जापान युद्ध में हार गया और उस पर अमेरिका का कब्जा हो गया था इसलिये हो सकता है कि नेताजी को छुपाये रखने के लिए उसने ऐसा कहा हो या हो सकता है कि नेताजी ने पकड़े जाने के स्थान पर स्वप्राण त्याग दिये हों या और कुछ भी हो सकता है.

नेताजी के परिवार ने कभी भी रंकोजी के अस्थि कलश को नेताजी की मृत्यु का सबूत नहीं माना है.

सरकार की इस दलील को भी व्यक्ति तर्कपूर्ण उचित नहीं मानता है कि नेताजी की फाइलें उजागर करने से किसी देश से संबंध खराब हो जाते. द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मन-जापान अन्य सभी देशों के दुश्मन थे और सभी देश उनके दुश्मन. आज उनका कोई दुश्मन नहीं है वे सभी के और सभी उनके मित्र हैं. एक नेताजी के मामले में ही ऐसा क्या था जिसे न सिर्फ कांग्रेस सरकारों बल्कि स्वयं भाजपाई प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार भी वैसा ही मानती रही और उसने भी उन फाइलों को ‘क्लासीफाइड सीक्रेटÓ ही माना.

द्वितीय विश्व युद्ध की किसी भी घटना या दुश्मनी का प्रभाव संसार से 1945 में युद्ध समाप्ति के 2-3 वर्ष में ही पूरी तौर पर खत्म हो गया था.

भारत में नेताजी के संबंध में कई बाबाओं के बारे में यह खबर हो जाती रही कि वे नेताजी हैं. उनमें एक शैलामारी आश्रम के बाबा थे और कभी फैजाबाद के एक बाबा को बताया गया. यदि वे भारत आ भी गये थे तो उनका परिवार यहीं था उसे तो वे अवश्य खबर देते. साथ वे बाबा भी कई दिनों तक यहां बने रहे. ये सब बेसिरपैर के किस्से ही थे. नेताजी का जन्मदिन राष्टï्र को ज्ञात है.

अब यह दायित्व श्री मोदी पूरा करने जा रहे हैं कि सभी गोपनीय दस्तावेजों के आधार पर उनकी मृत्यु का दिन भी नियत हो जाए. श्री मोदी राष्टï्रहित में बहुत बड़ा काम कर रहे हैं कि नेताजी के मामले में पूरी स्थिति स्पष्टï हो जाए.

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