gouri_singhइंदौर,  मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग के बड़वानी जिले में गत दिनों हुए मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद नेत्र रोगियों को इंदौर रेफर कर दिया गया था। आज रोगियों की हालत का जायजा लेने मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव गोरी सिंह इंदौर पहुंची।

श्रीमति सिंह ने यहाँ “यूनीवार्ता” से चर्चा करते हुए बताया की बड़वानी जिले से उपचार के लिए इंदौर पहुंचे नेत्र रोगियों के बेहतर उपचार के लिए मध्यप्रदेश सरकार सतत प्रयास कर रहीं हैं। उन्होंने बताया की बड़वानी अस्पताल की जाँच कराई गई जिसमे प्राथमिक जांच में पाये गए तथ्य से प्रतीत होता हैं की ऑपरेशन में इस्तेमाल की गई है सिलाइन में फंगस था और दूसरे ऑपरेशन उपकरणों की जांच की जा रही है।

विभाग की टीम ने ऑपरेशन में इस्तेमाल की गई दवाई, उपकरण और बैन्डेज के सैंपल लिए हैं। जांच में लिंगर लिक्टेड नाम की सिलाइन में फफूंद पाई गई है। उन्होंने बताया इसका इस्तेमाल ऑपरेशन के बाद ऑखों की सफाई के लिए किये जाने के तथ्य मिले हैं।

उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा की ऑपरेशन में की गई चूक लैब रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। श्रीमति गौरी सिंह ने इंदौर में उपचाररत मरीजों से मुलाकात करते हुए बताया की कुल संक्रमित मरीजों में से 7 मरीजों की हालत गंभीर है। इन्हे पहले फ्लाइट से दिल्ली स्थित आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस (एम्स) भेजने का प्रस्ताव रखा गया था। चूंकि पीडितो के परिजनों के इंकार करने बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्रिय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा से बात कर एम्स की विशेषज्ञ टीम इंदौर भेजने हेतु चर्चा की और इस पर सहमति भी मिल गई है। उन्होंने बताया शुक्रवार को बड़वानी में ऑपरेशन के दौरान सेवारत छह डाक्टरों सहित कर्मचारियों को प्रारंभिक रूप से दोषी पाये पर निलंबित कर दिया गया हैं।

बड़वानी जिले में मोतियाबिंद ऑपरेशन करवा चुके लगभग 25 मरीजों को आँखों में तकलीफ होने के बाद इंदौर रेफर कर दिया गया था।

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