modiनयी दिल्ली,  नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल ‘प्रचंड’ का आज यहां राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में पूर्ण सैनिक सम्मान के साथ स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रीमती सीता दहल एवं श्री प्रचंड का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में पहुँचने पर स्वागत किया। श्री प्रचंड ने सेना के तीनों अंगों की एक संयुक्त टुकड़ी द्वारा पेश सलामी ली और फिर सलामी गारद का निरीक्षण किया।

बाद में श्री मोदी ने श्री प्रचंड का अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों से तथा श्री प्रचंड ने श्री मोदी काे अपने साथ आए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का परिचय कराया। इसके बाद श्री प्रचंड राजघाट के लिये रवाना हो गये और वहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धासुमन अर्पित किये। बाद में उन्होंने राष्ट्रपति भवन के विशिष्ट अतिथि गृह में जाकर औपचारिक मुलाकात की। तत्पश्चात नेपाली प्रधानमंत्री हैदराबाद हाउस के लिये रवाना हाे गये जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से शिखर बैठक होगी।

श्री प्रचंड भारत की चार दिन की यात्रा पर कल अपराह्न यहां पहुंचे थे। विदेश मंत्री श्रीमती स्वराज ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उनका स्वागत किया था। भारत सरकार ने उन्हें उच्च सम्मान देते हुए राष्ट्रपति भवन परिसर के विशिष्ट अतिथि गृह में ठहराया है। नेपाली प्रधानमंत्री के साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आया है जिसमें विदेश मंत्री प्रकाश शरण महत और ढांचागत विकास मंत्री रमेश लेखक शामिल हैं।

भारत सरकार का कहना कि श्री प्रचंड की यह सद्भावना यात्रा है और भारत उनसे जानना चाहेगा कि उनकी सरकार की प्राथमिकतायें क्या हैं और भारत सरकार उसमें किस प्रकार से मदद कर सकती है। नेपाल के नये संविधान में मधेसी और जनजातीय समुदायों की आकांक्षाओं को शामिल किये जाने की आशाओं के साथ अगस्त में सत्ता की बागडोर संभालने वाले श्री प्रचंड से भारत के साथ संबंधों में व्यावहारिक सुधार की भी उम्मीदें लगायीं जा रही हैं।

समझा जाता है कि भारतीय नेतृत्व नेपाल की नई सरकार को संविधान में जल्द से जल्द अपेक्षित संशोधन करने की मित्रवत सलाह दे सकता है ताकि नेपाल में स्थिरता कायम हो सके। भारत का साफ तौर पर मानना है कि संविधान को सर्वसमावेशी बनाने की उसकी सलाह का नेपाल के अंदर किसी के समर्थन या विरोध से कोई लेना-देना नहीं है। यह भारत और नेपाल दोनों के हित में है। हैदराबाद हाउस में शिखर बैैठक में दोनों देशों के बीच विकास साझेदारी खासकर ढाँचागत विकास और ऊर्जा विक्रय करार के बारे में बातचीत होगी ।

भारत नेपाल के तराई क्षेत्र में 1800 किलोमीटर लंबे पोस्टल मार्ग के निर्माण पर आगे कदम बढ़ा सकता है । भारत के सहयोग से नेपाल में बन रही 6800 मेगावाट क्षमता की पनबिजली परियोजनाओं से उत्पादित विद्युत को भारत को निर्यात करने संबंधी प्रक्रियाओं पर बातचीत की जायेगी । इसके अलावा रेलवे लिंक और गैस एवं पेट्रोलियम पाइपलाइन के बारे में भी काम तेजी से बढ़ाने पर बातचीत होने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर किये जायेंगे और दोनों नेता प्रेस वक्तव्य भी देंगे।

शिखर बैठक के अलावा श्री प्रचंड वित्त मंत्री अरुण जेटली, गृह मंत्री राजनाथ सिंह और ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल से भी मिलेंगे। नेपाल में आर्थिक प्रगति को तेज करने एवं निवेश को बढ़ाने के उद्देश्य से श्री प्रचंड एसोचैम के ज्वांइट बिजनेस मीट में शिरकत करेंगे। आज शाम को उनकी राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी से भी औपचारिक मुलाकात होगी। कल सुबह वह हिमाचल प्रदेश में नाथपा झाकड़ी पनबिजली परियोजना को देखने जायेंगे।

इसी वर्ष फरवरी में भारत यात्रा पर आये तत्कालीन नेपाली प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने भी उत्तराखंड की टिहरी जल विद्युत परियोजना का अवलोकन किया था। वह रविवार की सुबह स्वदेश लौटेंगे। भारत को उनकी यात्रा के ठोस परिणाम की उम्मीद है। उनकी यात्रा के बाद नेपाली राष्ट्रपति विद्यादेवी भंडारी की भारत यात्रा और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की नेपाल यात्रा होगी ।

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