आठ साल की लम्बी राजनैतिक खींंचतान और अवरोधों के बाद अन्तत: नेपाल का संविधान 16 सितम्बर 2008 को बन गया और 20 सितम्बर को राष्टï्रपति श्री राम बरन यादव के हस्ताक्षर के साथ ही देश में लागू हो गया.

देश तीन दशकों तक माओवादी आतंकी हिंसा व विद्रोह में एक अशांत राष्टï्र बना रहा. अल्पकाल की कई सरकारों का दौर चलता रहा. इन्हीं दौर में माओवादी प्रचंड भी प्रधानमंत्री बने और टिक नहीं पाये. नेपाल में प्रधानमंत्री श्री वी.पी. कोइराला के नेतृत्व में नेपाली कांग्रेस की भारी जीत से वहां संसदीय सरकार की स्थापना हो गयी थी. लेकिन नेपाल नरेश महेंद्र ने उसे बर्खास्त कर पुन: राजतंत्री समर्थन से अनेक रूपों में सरकारें बनायी-बिगाड़ती रही. तभी से नेपाल में राजतंत्र के विरुद्ध जन-भावनायें बढ़ती गयीं और यह मांग व आंदोलन भी मुखर हो गये कि नेपाल से राजशाही को खत्म कर देश में पुन: लोकतंत्री संसदीय प्रणाली की शासन व्यवस्था की जाए. इसी समयकाल के दरम्यान वहां माओवादी हिंसक आंदोलन भड़क उठा और देश में राजनैतिक अस्थिरता और हिंसा का दौर चल पड़ा.

अन्तत: माओवादियों ने हथियार डाल दिये और राजनीति की मुख्यधारा में लौट आये. देश में राजशाही खत्म कर दी गयी और उसे गणतंत्र (रिपब्लिक) बना दिया गया. संविधान सभा का चुनाव हुआ कि वह देश का गणतंत्रीय संविधान प्रदान करे. लेकिन 601 सदस्यीय संविधान सभा में किसी एक दल का दो तिहाई बहुमत न होने से राजनैतिक दलों के परस्पर विरोधी रुकावटों के कारण संविधान नहीं बन सका और संविधान सभा भी समयकाल में भंग हो गयी. एक अंतराल के बाद दूसरी संविधान सभा का चुनाव किया. इसमें भी गतिरोध चलते रहे लेकिन हताशा व निराशा के चलते यह आशा भी दिखाई दी कि राजनैतिक दल यह मान रहे हैं कि राजतंत्र तो खत्म कर दिया, लेकिन उसकी जगह बाकायदा संवैधानिक लोकतंत्र की स्थापना न होना राष्टï्र और देश की जनता के प्रति राजनैतिक अभिशाप व क्षति है. उनमें इस बात पर एकता भी हो गयी कि संभव सहमति के आधार पर संविधान बना लिया जाए. अंतत: यह धर्म निरपेक्ष स्वरूप का 7 राज्यों के संघीय स्वरूप का संविधान बनकर लागू हो गया है.

भौगोलिक दृष्टिï से नेपाल के उत्तर में पहाड़ी नेपाल है और दक्षिण में मैदानी नेपाल है. उत्तरी लोग पहाड़ी और दक्षिण के मैदान के लोग मदेशी और थारू कहलाते हैं.
पहाड़ी लोग नेपाली बोलते हैं और मदेशी-थारु हिन्दी भाषी हैं. नेपाल की अधिकांश खाद्यान्न पैदावार दक्षिण के मैदानी-तराई के इलाके में होती है. यह सम्पन्न लोगों का इलाका है. ये लोग इस संविधान के खिलाफ हैं. राजतंत्रीय शासन में नेपाल हिन्दू राष्टï्र था, लेकिन 2008 में इसे धर्म निरपेक्ष राष्टï्र बना दिया. मदेशी चाहते थे कि उसे पुन: हिन्दू राष्टï्र बनाया जाए, लेकिन संविधान सभा ने उसे नहीं माना. इसलिये 601 सदस्यीय संविधान सभा में 507 ने इस संविधान के पक्ष में मत दिया और 25 हिन्दू समर्थकों ने विरोध में मत दिया और मदेशी पार्टियों के 60 सांसदों ने इसका बहिष्कार किया. इस तरह यह संविधान सर्वसम्मत नहीं रहा. लेकिन संविधान न होने से संविधान का बन जाना हर हाल में ठीक रहा.