अन्तरदेशीय- नेपाल और भारत में आये अत्यन्त तीव्र 7.9 रिक्टर स्केल पर मापे गये भूकम्प में हिमालयी पहाड़ी राष्ट्र नेपाल तबाह हो गया और तीन चौथाई भारत थर्रा गया. बंगलौरु, कोच्ची और कोलकाता तक थर्रा गया. नेपाल की सीमा से लगे राज्यों उत्तरप्रदेश व बिहार में भी विनाश का मंजर रहा जो नेपाल की तुलना में काफी कम था.

नेपाल में जैसा नाश हुआ है उससे तो अब उसका पुन: निर्माण ही करना होगा. राजधानी काठमांडू खंडहर में तब्दील हो गई है. सभी प्राचीन निर्माण धराशायी हो गये. जिस तीव्रता 7.9 का यह भूकम्प था उसी तीव्रता में यह समुद्री क्षेत्र में उसका मंथन कर प्रचण्ड सुनामी लहरें पैदा कर तटवर्ती राष्ट्रों में कहर ढा देता है.
अभी प्रारंभिक अनुमान में नेपाल में 2500 लोग मारे गये हैं लेकिन पूरे राष्ट्र में जो विनाश आया है और अंतिम गणना में यह मृत्यु संख्या भी दिल दहला देगी.
भारत ने आजादी के बाद भी काफी लम्बे अर्से के बाद इस जरूरत को पूरा कर लिया है कि उसने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिये राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्था (नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एजेन्सी) गठित कर ली है. इसने केदारनाथ में भूमिस्खलन से झील टूटने की बाढ़ आपदा में अपने कौशल का बड़ा ही जांबाज प्रदर्शन किया था. नेपाल में इस समय भूकम्प आते ही एन.डी.एम.ए. फौरन वायुसेना के सुपर ट्रांसपोर्ट वायुयान हरक्यूलिस के साथ नेपाल पहुंच गये और इस एजेन्सी की अनेक टीमें वहां नेपाल में जगह-जगह पहुंचने लगी हैं. नेपाल… हिमालयी पहाड़ी राज्य है यहां बचाव अभियान बड़ा दूभर होता है. केदारनाथ आपदा में भी पूरा क्षेत्र हिमालयी पहाड़ी था. वहां के तीर्थयात्री पहाड़ी इलाकों से वाकिफ नहीं थे लेकिन नेपाल के लोग पहाड़ी जनजीवन के ही लोग हैं.
दो देशों नेपाल व भारत में आये इस संकट से भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उसे आपसी भावना आपसी-आपदा माना है. फौरन ही पूरा देश नेपाल के साथ खड़ा हो गया और राहत कार्य के लिए भारतीय रक्षक टीमें जुट गयी हैं. सेना के तीनों अंगों राष्टï्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी, सीमा सड़क संगठन और पूरी भारत सरकार इस आपदा में नेपाल के साथ एकजुट हो गयी है. सभी ने हाई अलर्ट पर काम करना प्रारंभ कर दिया है.

इतने बड़े भूकम्प के बाद कई दिनों तक छोटे-हल्के ”आफ्टर शाक” आते रहते हैं. इससे नुकसान कुछ नहीं होता लेकिन डरे हुए लोग और ज्यादा डरने लगते हैं. फिलहाल यह अभियान चल रहा है कि सबसे पहले ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जाए. इसके बाद ही इस भावना से ”है नाश जहां- निर्माण वहीं”से काम होगा. इस त्रासदी के बाद नेपाल को निर्माण में नया स्वरूप दे दिया जायेगा.
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र भूकम्प के हिसाब से संवेदनशील है और वहां ऐसी विपदाओं का आना आशंकित रहता है. यहां नव निर्माण में अब इस बात का ध्यान अवश्य रखा ही जायेगा कि उनमें यह बात प्रमुख होगी ही कि सब भूकम्परोधी पद्धति से निर्मित हों. जापान को इस क्षेत्र में महारत हासिल है.
मध्यप्रदेश इस त्रासदी में बाल-बाल बच गया. यह राज्य पूरा का पूरा थर्रा गया. लेकिन विनाश कुछ भी नहीं हुआ. उत्तरप्रदेश, बिहार में अवश्य ही कुछ टूट-फूट, मृत्यु हो गयी है. मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वयं इसे वल्लभ भवन में महसूस किया और ईश्वर का आभार व्यक्त किया.

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