नेपाल इन दिनों नये संविधान को लेकर समस्याओं के जंजाल में ऐसा उलझ गया है कि कोई निदान -समाधान ही नजर नहीं आ रहा है. हर पक्ष का अपना औचित्य है. राजतंत्र को उखाड़ दिया है लेकिन उसके स्थान पर संवैधानिक गणतंत्र स्थापित नहीं हो पा रहा है. नेपाल भौगोलिक दृष्टिï से उत्तर में पहाड़ी क्षेत्र और दक्षिण में मैदानी क्षेत्र में बटा है. उत्तर में पहाड़ों पर ऐसे लोग बसे है जिन्हें पहाड़ी कहा जाता है. जो उन्हें नेपाल के मूल निवासी मानते है और नेपाली भाषा बोलते है. दक्षिण के मैदानी तराई इलाके के लोग मधेशी कहलाते है.

जिनके पूर्वज सैकड़ों साल पहले भारत में जाकर बसे थे. ये हिन्दी, भोजपुरी, मैथली भाषाएं बोलते है जो बिहार और उत्तरप्रदेश के लोग बोलते है. पहाड़ी नेपाली इन्हें प्रवासी नेपाली मानते है. संविधान में इनके साथ आधिकार व प्रांत निर्माण में बड़ा भेदभाव किया गया है. इन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक माना गया है. इनका कहना है कि यदि इसे अभी स्वीकार कर लिया गया तो यह स्थाई हो जायेगा और उनके लिये और उनकी आने वाली पीढिय़ों के लिये यह जीवन-मरण का प्रश्न है. वे इस बात पर आमादा है कि वे इस संविधान को स्वीकार नहीं करेंगे.

नेपाल पूर्व-दक्षिण व पश्चिम में भारत व उत्तर में चीन की सीमा से सटा-कसा (लेंड लाक्ड) राष्टï्र है. परंपरा व संस्कृति में वह भारत के निकटतम है. उससे भी बड़ी बात यह है कि उसके यहां सभी सामान की सप्लाई भारत से होती है.
भारत-नेपाल के बीच-पासपोर्ट-वीजा सिस्टम नहीं है. दोनों देशों के लोग निर्बाध रूप से आते-जाते व्यापार करते हैं. सीमा क्षेत्रों में एक दूसरे की करेन्सी भी स्वीकार कर लेते हैं. संविधान के विरोध में मधेशियों ने यहां के चेक पाइंट नाकों में से भारत से नेपाल में आने वाले ट्रकों को रोक दिया है. पूरे नेपाल में सभी वस्तुओं की भारी कमी हो गयी है.

यहां मधेशियों ने आर्थिक नाकेबंदी लागू कर दी है. ऐसे में सरकार व पहाड़ी नेपालियों के सामने भी यह मजबूरी हो गयी है कि उत्तर में चीन से यह कहे कि नेपाल में अब तक सामान की जो आपूर्ति भारत करता रहा है अब वह इस नाकेबंदी के कारण चीन को करे. यदि ऐसा हुआ तो नेपाल में चीन का प्रभाव व राजनैतिक रुतबा कायम हो जायेगा. लेकिन वह मधेशिया के क्षेत्र तक नहीं पहुंच पायेगा. वहां भारत से सप्लाई लाइन जारी रहेगी.
इस तरह नेपाल आर्थिक व राजनैतिक दृष्टिï से भारत व चीन के बीच में बंट सा जायेगा.

भारत के सामने भी मधेशियों की आर्थिक नाकेबंदी समस्या आ गयी है. भारत में सामान से लदे ट्रक भारत -नेपाल सीमा पर खड़े हैं और मधेशी उन्हें आने नहीं दे रहे. भारत यदि चाहे भी तो नेपाल की सीमा में अपनी पुलिस व फौज नहीं भेज सकता. भारत ने नेपाल से स्पष्टï कहा है कि उसने अपनी तरफ से कोई सप्लाई नहीं रोकी है न ही उसने कोई आर्थिक नाकेबंदी की है.

मधेशियों का आंदोलन व नाकेबंदी नेपाल की अपनी समस्या है. वह वहां से नाकेबंदी खत्म कराये. सप्लाई ट्रक नाके पर लदे खड़े हैं- वे फौरन अंदर आ जायेंगे. भारत के सामने नेपाल में संविधान पर विवाद नेपाल की एकता व अखंडता का सवाल भी बन गया है और कूटनीतिक दृष्टिï से यहां भारत और चीन एक-दूसरे के सामने प्रतिस्पर्धी के रूप में आ सकते हैं.