नयी दिल्ली,  राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने ‘सबका साथ सबका विकास ’ के सिद्धांत को सरकार की नीतियाें का केन्द्र बिन्दु बताते हुए आज कहा कि उसने काले धन, भ्रष्टाचार, और आतंकवादियों को ‘फंडिंग’ पर नोटबंदी से करारी चोट करने के साथ साथ सर्जिकल स्ट्राइक कर सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का सख्त संदेश दिया है।

राष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अपने कार्यकाल के अंतिम अभिभाषण में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने तथा चुनाव के लिए सरकारी खर्च उपलब्ध कराने के संबंध में चर्चा करने की आवश्यकता भी बतायी। उन्होंने कहा कि बार बार चुनाव होने से विकास कार्य रूक जाते हैं और सामान्य जीवन अस्त व्यस्त हो जाता है।

चुनाव में धन का दुरूपयोग रोकने के लिए उम्मीदवारों को सरकारी खजाने से पैसा उपलब्ध कराने पर विचार करने की जरूरत है। सरकार को गरीब, दलित, पीडित, शोषित, वंचित, किसान , श्रमिक और युवाओं के कल्याण के प्रति वचनबद्ध बताते हुए श्री मुखर्जी ने कहा कि इनके उत्थान के लिए शिक्षा, रोजगार, आर्थिक और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अनेक योजनाओं की शुरूआत की गयी है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी को गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। आतंकवाद को दुनिया के लिए बड़ा खतरा बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके खात्मे तथा क्षेत्रीय संप्रभुता के उल्लंघन के खिलाफ सरकार निर्णायक कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी और इसी के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सफल सर्जिकल स्ट्राइक की है। वित्तीय समावेश को गरीबी उन्मूलन का मूल मंत्र बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार हर व्यक्ति को बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर उसे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में काम कर रही है।

इसके लिए बैंक से लेकर डाकघरों तक विभिन्न योजनाएं शुरू की गयी हैं। सभी के लिए आवास योजना के तहत हर व्यक्ति को छत मुहैया कराने के लिए सस्ते रिण उपलब्ध कराये जा रहे हैं। महिलाओं विशेष रूप से वंचित समुदाय की महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों के लिए विशेष सहायता राशि का प्रावधान किया गया है।

बेरोजगारी पर चोट करते हुए युवाओं को कुशल तथा हुनरमंद बनाने के लिए विशेष योजना शुरू की है। मौजूदा बजट सत्र को ऐतिहासिक करार देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इसमें पुरानी परंपराओं को तोड़कर नयी शुरुआत की गयी है। स्वतंत्र भारत में पहली बार बजट सत्र को अपने निर्धारित समय से पहले बुलाया गया है और रेल बजट को आम बजट में समाहित किया जा रहा है।

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