hardik1सूरत/अहमदाबाद,  गुजरात में पिछले लगभग एक साल से चल रहे पाटीदार आरक्षण अांदोलन के नेता हार्दिक पटेल आज करीब नौ माह के बाद यहां सूरत के लाजपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गये। गुजरात हाई कोर्ट ने गत आठ जुलाई को उन्हें राजद्रोह के दो मामलों और 11 जुलाई को विसनगर हिंसा प्रकरण में जमानत दे दी थी। न्यायिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद आज उन्हें जेल से रिहा किया गया। जमानत की शर्त के अनुरूप उन्हें रिहाई के 48 घंटे बाद छह माह के लिए गुजरात से बाहर जाना होगा।

हार्दिक ने रिहाई के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आंदोलन की पद्धति बदलने के बावजूद इसक तेवर पुराना ही रहेगा और पाटीदार समाज का हक मिलने तक यह जारी रहेगा। अपनी मांगों के लिए वह सरकार से भी बातचीत को तैयार हैं। उन्होंने अपने आंदोलन को गैर राजनीतिक बताते हुए कहा कि यह किसी पार्टी की जागीर नहीं है। अपनी रिहाई के लिए उन्होंने न्याय तंत्र के प्रति अाभार भी प्रकट किया। उन्होंने कहा कि हालांकि न्याय में थोडा विलंब हुआ है पर सत्य की जीत हुई है।

23 वर्षीय हार्दिक को गत वर्ष 18 अक्टूबर को राजकोट में भारत-दक्षिण अफ्रीका मैच में व्यवधान डालने के प्रयास तथा तिरंगे के कथित अपमान के लिए पकडा गया था। बाद में पडधरी की एक अदालत ने उन्हें जमानत दे दिया पर इसके कुछ ही देर बाद 19 अक्टूबर को सूरत पुलिस ने राजद्रोह के एक मामले में उन्हें पकड लिया था। इसके बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने भी राजद्रोह के एक अन्य मामले में उनका रिमांड लिया था। गिरफ्तारी के दौरान उन्हें सूरत के लाजपुर जेल में ही रखा गया था।

हार्दिक रिहाई के बाद सूरत में एक रोड शो और पास नेताओं के साथ बैठक करेंगे और वह शाम को अहमदाबाद आयेंगे और कल अपने पैतृक निवास वीरमगाम जाएंगे जहां से वह गुजरात से बाहर चले जाएंगे। हार्दिक ने गुजरात से बाहर राजस्थान में रहने के संकेत दिये हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वह देश भर में अपनी जाति कुर्मी के हक के आंदोलन को मजबूत बनायेंगे।