नवभारत न्यूज भोपाल,

हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी अधिनस्थ न्यायालयों में पदस्थ कर्मचारियों की कथित रूप से अवैध वसूली और घूसखोरी पर शिकंजा कसने के लिए एक अनुकरणीय एवं सार्थक पहल की है.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट प्रशासन के निर्देश पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र शुक्ला ने जिला अदालत में पदस्थ सभी न्यायाधीशों को एक परिपत्र जारी कर न्यायिक कर्मचारियों की अवैध वसूली और घूसखोरी को रोकने और ऐसे न्यायिक कर्मचारियों पर बारीक नजर रखने को कहा है.

जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेंद्र शुक्ला ने 6 दिसंबर को जारी परिपत्र में कहा है कि- माननीय उच्च न्यायालय मप्र, जबलपुर के द्वारा यह तथ्य संज्ञान में लाया गया है कि अधीनस्थ न्यायालयों में पदस्थ कर्मचारीगण घूस/रिश्वत लेने में संलिप्त होना पाए जा रहे हैं.

जिससे आम जनता में न्यायपालिका की छवि धूमिल हो रही है. न्यायिक कर्मचारियों को अपने कर्तव्य का पालन मप्र सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के अंतर्गत पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी, तत्परता एवं शिष्टाचार के साथ निष्पादित किया जाना चाहिए.

उक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए अधीनस्थ न्यायालयों में पदस्थ कर्मचारियों के कार्य एवं आचरण पर सूक्ष्मता से निगरानी करने हेतु न्यायिक अधिकारीगण को निर्देशित किया जाना लेख किया गया है.

उक्त निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में इस परिपत्र के माध्यम से न्यायिक स्थापना पर पदस्थ सभी न्यायिक अधिकारियों को निर्देशित किया जाता है कि वह अपने अधीनस्थ पदस्थ कर्मचारीगण की कार्यशैली एवं आचरण पर सूक्ष्मतापूर्वक निगरानी रखें कि उनका कृत्य सेवा नियम के विरुद्ध न हो.

यदि किसी कर्मचारी का आचरण उक्त नियम के प्रतिकूल पाया जावे तो इस संबंध में जिला सत्र न्यायाधीश कार्यालय को अवगत कराया जाए.अदालत में लगभग पांच सौ न्यायिक कर्मचारी कोर्ट रीडर, स्टेनो और चपरासी के पद पर पदस्थ हैं.

इनमें बामुश्किल चार या पांच कर्मचारी ही ऐसे हैं जोकि दिए जाने पर भी रिश्वत लेने से साफ इंकार कर देते हैं. इन चार-पांच कर्मचारियों के अलावा बाकी के सब कर्मचारी रिश्वत लिए बगैर नहीं मानते. इनमें महिला कर्मचारी भी पीछे नहीं हैं. बगैर रिश्वत दिए पक्षकारों को पेशी की तारीख देने में भी परेशान किया जाता है.

पेशी पर आने वाले पक्षकारों को अगली पेशी की तारीख लेने के लिए कोर्ट के रीडर, कोर्ट मुंशी और चपरासी को 50 रुपए से लेकर 100 रुपए तक रिश्वत देना होती है. जो पक्षकार रिश्वत नहीं देता या उसके पास रिश्वत देने के लिए रुपया नहीं होता, उसे कर्मचारियों द्वारा परेशान किया जाता है.

जिस व्यक्ति की जमानत होती है उसे अथवा उसके साथ आए परिजन को रिश्वत के रुप में 500 रुपए न्यायिक कर्मचारियों और कोर्ट मुंशियों का बांटना होते हैं. अगर कोई वकील अपने पक्षकार की जमानत कराने के बाद कर्मचारियों को रिश्वत नहीं देता है या देना भूल जाता है तो संबंधित कर्मचारी वकील की सीट पर पहुंच जाते हैं रिश्वत का तकादा करने.

न्यायिक कर्मचारियों और कोर्ट मुंशियों की रिश्वतखोरी की वकीलों ने कई शिकायतें जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट प्रशासन को की हैं.एडवोकेट एसोसिएशन फॉर जूनियर के अध्यक्ष यावर खान ने कर्मचारियों की रिश्वतखोरी पर रोक लगाए जाने के लिए कोर्ट रुमों के अंदर कैमरे लगाए जाने की मांग भी कई बार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट प्रशासन और जिला एवं सत्र न्यायाधीश से की हैं.

न्यायालयों में अवैध वसूली और घूसखोरी पर लगाम के लिए यह एक अच्छा प्रयास है. न्यायिक कर्मचारी संघ इस निर्णय का स्वागत करता है और वकीलों एवं पक्षकारों से निवेदन करता है कि अगर कर्मचारी रिश्वत की मांग करे तो वह संबंधित की शिकायत जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं मुझे कर सकते हैं. दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ हम कठोर कार्रावाई की अनुशंसा करेंगे.
– नीरज श्रीवास्तव
अध्यक्ष, न्यायिक कर्मचारी संघ

हमने हाईकोर्ट प्रशासन और जिला एवं सत्र न्यायाधीश को न्यायिक कर्मचारियों और कोर्ट मुंशियों की रिश्वतखोरी की कई शिकायतें की थीं. हमारे शिकायती आवेदनों पर ही यह कार्यवाही की जा रही है. हम वकीलों एवं पक्षकारों से अपील करते हैं कि न्यायालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए किसी प्रकार की अवैध राशि कर्मचारियों को न देकर हमारी मुहिम में सहयोग देवें.
– यावर खान
अध्यक्ष – एसोसिएशन फॉर जूनियर

हमने हाईकोर्ट प्रशासन और जिला एवं सत्र न्यायाधीश को न्यायिक कर्मचारियों और कोर्ट मुंशियों की रिश्वतखोरी की कई शिकायतें की थीं. हमारे शिकायती आवेदनों पर ही यह कार्यवाही की जा रही है. हम वकीलों एवं पक्षकारों से अपील करते हैं कि न्यायालय में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए किसी प्रकार की अवैध राशि कर्मचारियों को न देकर हमारी मुहिम में सहयोग देवें.
– यावर खान
अध्यक्ष – एसोसिएशन फॉर जूनियर

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