पठानकोट में वायुसेना बेस स्टेशन पर पाक आतंकी हमले के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच निर्धारित विदेश सचिव वार्ता रद्द तो नहीं की गयी, लेकिन इस कारण उसे आगे किसी समय करने का विचार व्यक्त किया गया. उसी समय यह भी हमेशा की तरह स्पष्टï था कि इस वार्ता को ही सेबोटाज करने के लिए पाक के आतंकी संगठन जैशेे मोहम्मद ने यह हमला कराया था.

यह भी हमेशा के लिये निश्चित हो गया है कि जब भी दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के लिए वार्ता का कार्यक्रम बनेगा उसे बिगाडऩे के लिए पाकिस्तान के आतंकी संगठन और आर्मी कुछ न कुछ ऐसा कर ही देंगे कि वार्ता रद्द हो जाए. इस बार इतना जरूर कुछ नया हुआ कि बात का कार्यक्रम आगे बढ़ा दिया गया, लेकिन उसे रद्द नहीं कहा गया. पठानकोट हमले में पाकिस्तान ने यह तो मान लिया है कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन द्वारा यह कराया गया था. नवाज शरीफ जब भी सत्ता में आये उन्होंने इस दिशा में पहल की.

भारत के प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी और श्री नवाज शरीफ ने लाहौर वार्ता से संबंधों को बहुत हद तक मित्रता के बना दिये. उसे लाहौर बस डिप्लोमेसी कहा जाने लगा और लाहौर में दोनों प्रधानमंत्रियों ने लाहौर घोषणा (डिक्लेरेशन) पर हस्ताक्षर भी कर दिए. इसी को सेबोटाज करने उस समय पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल मुशर्रफ भी इस हद तक चले गये कि वे श्री वाजपेयी की वहां अगवानी के समय मौजूद नहीं रहे और उनके सम्मान में श्री शरीफ ने जो भोज दिया उसमें भी शामिल नहीं हुए. शायद ही… संसार में इससे पहले कहीं भी सेना प्रमुख ने अपने प्रधानमंत्री व सरकार के प्रति इतनी उद्दंडता दिखायी हो. ऐसा भी पहली बार हुआ कि जनरल मुशर्रफ बिना प्रधानमंत्री से आज्ञा प्राप्त किये सिर्फ लाहौर वार्ता को नेस्तनाबूत करने स्वयं अपने निर्णय से भारत के कारगिल क्षेत्र में सेना का विधिवत् हमला कर दिया.

इससे मिलता-जुलता एक ऐसा कांड अमेरिका में हुआ था कि एक समय कोरिया में गृहयुद्ध छिड़ गया. उत्तरी भाग को चीन व रूस का और दक्षिण भाग को अमेरिका फौजी का समर्थन था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कोरिया दोनों सुपर पावर अमेरिका व सोवियत यूनियन के बीच परोक्ष युद्ध बनता जा रहा है. अमेरिकी 5 स्टार… जनरल मेक आर्थर ने परमाणु बम इस्तेमाल का सुझाव अपनी सरकार को दिया और राष्टï्रपति हेरी ट्रूमेन ने जनरल मेक आर्थर को बर्खास्त कर दिया. पाकिस्तान में भी श्री शरीफ ने जनरल मुशर्रफ को लाहौर उद्दंडता के संदर्भ में पद से हटा दिया. लेकिन पाकिस्तान में आर्मी हमेशा से अभी इस समय तक अपने आपको नागरिक सत्ता से ऊपर बनाये रखती है. जनरल मुशर्रफ ने ऐसी फौजी चाल चली कि उसने नवाज शरीफ सरकार का तख्ता पलट फौजी शासन कायम कर लिया और आगे चलकर श्री शरीफ को साऊदी अरब से निष्कासित कर दिया.

राजनैतिक घटनाक्रम में कालान्तर में वहां फिर नागरिक सरकार बनी है और नवाज प्रधानमंत्री हैं और मुशर्रफ जेल में हैं.

लेकिन अब भारत भी इस बात के लिये तैयार हो चुका है कि जब भी भारत-पाक संबंध सुधारने के प्रयास होंगे तब पाकिस्तान की अन्दरुनी राजनीति में वहां की फौज व आतंकी संगठन कुछ न कुछ ऐसा जरूरी करेंगे कि दोनों देशों के बीच वार्ता आगे न बढ़े. अभी हाल ही पाक कब्जे वाले काश्मीर के एक नेता ने कहा है कि वहां आतंकी बहुत सक्रिय हैं मगर उनका कश्मीरियों के हित से कोई मतलब नहीं है. वे वहां सत्ता बन चुके हैं और भारत विरोधी उन्माद में कश्मीर के लोगों को ही परेशान कर रहे हैं.

27 मार्च को पाकिस्तान की टीम पठानकोट हमले की जांच के लिए आ रही है. उससे क्या होगा, कैसे होगा इस पर अभी से कोई उम्मीद या अंदाजा लगाना उपयुक्त नहीं होगा.

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