भारत की पीठ में एक बार फिर पाकिस्तानी जमीन से प्रायोजित आतंकवाद ने खंजर घोंपा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी 25 दिसंबर को ही एकाएक पाकिस्तान की यात्रा पर गए थे और दोनों देशों के बीच फिर से संबंधों में नई शुरूआत की पहल की थी. लेकिन नए साल के दूसरे दिन जो आतंकी नजारा सामने आया उसने एक बार फिर समूचे भारत को हतप्रभ कर दिया है. यह दूसरा मौका है जब प्रधानमंत्री की दोस्ती की पहल को पाक प्रायोजित आतंकवाद से इस तरह का जवाब सामने आया है. तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपयी भी बहुत अच्छी मंशा के साथ बस लेकर लाहौर गए थे. लेकिन उनके लौटने के बाद भारत के कारगिल में पाकिस्तान ने घुसपैठ कर हमारी पीठ में खंजर घोंपा था.

कल पठानकोट में जो कुछ हुआ वह पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर नए सोच की दरकार रखता है. पांच आतंकवादी हमारे देश में गलत तरीके से प्रवेश कर एसपी को अगुआ करते हुए पठानकोट एयरबेस पर हमला करते हैं- यह कितनी सुनियोजित साजिश है, स्पष्ट तौर पर पता चल रही है. आतंकी सेना की वर्दी में आए थे. चक्की नदी के रास्ते से वे वायु सेना के अड्डे वाले विशेष सुरक्षा क्षेत्र में प्रवेश करते हुए पिछले रास्ते से अड्डे के भीतर प्रवेश करने और आतंक फैलाने में सफल रहे. वहां उन्होंने सुरक्षा में खड़े जवानों पर गोली दागी. इसके बाद जवाबी गोलीबारी हई जिससे वे दूसरा सुरक्षा घेरा तोड़ऩे में कामयाब नहीं हो जो तकनीकी क्षेत्र है जहां युद्धक विमान और हेलिकॉप्टर तैनात रहते हैं. इस लड़ाई के दौरान जवाबी गोलीबारी में पांचोंं आतंकवादियों को मार गिराया. इस दौरान ग्यारह जवान और अधिकारी भी शहीद हो गए.

इस घटना के बाद हमारी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रमुख तौर पर दो बिंदु उभरकर सामने आ रहे हैं. पहला यह कि तमाम चेतावनियों और आशंकाओं के बावजूद कैसे आतंकवादी सीमा पार से हमारे देश में हथियारों के साथ प्रवेश कर जाते हैं और उस क्षेत्र में जाकर हमला करते हैं जो वायु सेना का अड्डा है और अतिरिक्त सुरक्षा के घेरे में रहता है? दूसरा बिंदु यह है कि हमारी सतर्कता की वजह से ये आतंकी सेना के अड्डे के इस क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पाए जो तकनीकी क्षेत्र है और जहां हमारे लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर तैनात रहते हैं. दूसरा बिंदु राहत देता है लेकिन पहला बिंदु अभी भी कई सवाल खड़े कर रहा है? आतंकियों से जो चूक हुई थी, उसकी वजह से सतर्कता बढ़ी. उन्होंने एसपी का अपहरण किया उसके बाद उसके दोस्त के मोबाइल से पाकिस्तान पर बात की थी. इससे स्थानीय पुलिस, प्रशासन, सेना और गुप्तचर एजेंसिया अलर्ट हो गई थी. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस बात को स्वीकारा है कि पहले से सूचना मिलने के कारण सावधानियां बरती जा रही थी. इस आतंकी हमले में भी जैश-ए-मोहम्मद का नाम सामने आ रहा है. खूफिया सूत्रों का दावा है कि ये आतंकी पाकिस्तान के बहावलपुर से आए थे. भारत में तीन दिन पहले ही दाखिल हो गए थे. बकायदा इन आतंकियों ने यहां चल रहे ट्रेनिंग कैंप से आतंक का प्रशिक्षण लिया था.

भारत की जमीन पर पाकिस्तान की जमीन से प्रायोजित आतंकी हमले कोई नहीं बात नहीं है. यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है. भारत अनेक बार सबूत देकर पाकिस्तान और दुनिया के सामने इस मुद्दे को उठाता रहा है. पाक में आतंक के आकाओं पर केवल दुनिया को दिखाने के लिए कार्रवाई होती है और पर्याप्त सबूतों के बावजूद पाकिस्तानी कोर्ट इन आतंक आकाओं को रिहा कर देती है. तब सवाल यह उठता है कि पाक प्रायोजित इस आतंकवाद का खात्मा आखिर होगा कैसे? पाकिस्तान न तो आतंकवाद को प्रश्रय देना बंद कर रहा है और ना ही आतंकवादियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई ही कर पा रहा है.

दरअसल पाकिस्तान में हुकूमत आईएसआई और आतंकवादी संगठन मिलकर चला रहे हैं. वहां राजनीति तो कठपुतली मात्र है. राजनीति केवल दुनिया को दिखाने के लिए है, सारा कब्जा तो आतंकी संगठनों का है. अब सवाल यह उठता है कि हम बार-बार यह क्यों बताना चाह रहे हैं कि शांति प्रयासों के लिए भारत पहल कर रहा है. इन हालातों में यह रणनीति बनाने की जरूरत है कि शांति प्रयासों के लिए पहल अब पाकिस्तान से ही होना चाहिए.

तब क्या आतंकवाद पर भारत को अपने ‘मनुहारी स्वरूपÓ का कोई कड़ा विकल्प खोजना होगा. जब भी कोई आतंकी हमला होता है, चाहे कोई भी दल सरकार में हो, हमारे यहां से यही बयान आता है- हम आतंकी गतिविधियों का मुंह तोड़ जवाब देंगे.

वक्त आ गया है हमारी सुरक्षा व्यवस्था की समग्र समीक्षा करते हुए हम कूटनीति की नई रणनीति बनाएं. पठानकोट हमले ने एक बार फिर हमको हिलाकर रख दिया है. बहरहाल देश आतंकियों के नापाक इरादों को नेस्तानाबूद करने के लिए सेना को सेल्यूट करता है और इस लड़ाई मेंं अपनी जान गंवाने वाले वीर शहीदों को नमन करता है.

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