shivrajभोपाल,  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बतौर मुख्यमंत्री अपने 10 साल का कार्यकाल पूरे होने पर आज कहा कि उनकी पत्नी और परिवार के सहयोग के बिना ये सफर असंभव सा था।

मुख्यमंत्री के तौर पर अपने 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के मौके पर आज यहां सेंट्रल प्रेस क्लब की ओर से आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम में श्री चौहान ने हल्के-फुल्के मूड में पत्रकारों के सवालों के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में खुशनसीब हैं कि उनके सार्वजनिक जीवन के दौरान उनकी पत्नी साधना सिंह चौहान और परिवार बेहद सहयोगी रहे और इसके बिना वे अपना सफर पूरा नहीं कर सकते थे।

पत्रकारों से चर्चा के दौरान कुछ बातों का जिक्र करते हुए श्री चौहान भावुक भी दिखे। उन्होंने कहा कि उनके पूरे कार्यकाल में झाबुआ के पेटलावद में इस साल सितंबर में हुए भीषण विस्फोट और दतिया के रतनगढ मंदिर में अक्टूबर 2013 में हुई भगदड दो ऐसे हादसे रहे, जिन्होंने उन्हें खासा विचलित कर दिया था।
पेटलावद में एक गोदाम में रखी जिलेटिन छडों में हुए विस्फोट में 89 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं रतनगढ में देवी मंदिर में नवरात्रि के दौरान मची भगदड में 110 से भी अधिक लोग मौत के मुंह में समा गए थे। दोनों ही हादसों में मरने वालों में बडी संख्या महिलाओं और बच्चों की थी।

इस दौरान उन्होंने प्रदेश की बच्चियों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं जैसे लाडलीलक्ष्मी और मुख्यमंत्री कन्यादान योजनाओं के पीछे की मूल धारणा भी बताई। भावुक अंदाज में उन्होंने कहा कि एक कार्यक्रम में वे ग्रामीणों से बेटी बचाओ की अपील कर रहे थे। इसी दौरान एक ग्रामीण वृद्धा ने उनसे तैश में आकर कहा कि भाषणबाजी अलग बात है, ये बताओ कि बेटियों को बचा कर, पढा लिखाकर जब उनकी शादी की बात होगी, तो हम उनके लिए दहेज कैसे इकट्ठा करेंगे।

मुख्यमंत्री के मुताबिक बुजुर्ग महिला की इस बात से वे निरूत्तर हो गए और उन्होंने अपने मन में ठान लिया कि प्रदेश की बेटियों को वे ‘लाडली लक्ष्मी’ बना कर रहेंगे।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्रदेश में बालिका जन्म के प्रति जनता में सकारात्मक सोच, लिंग अनुपात में सुधार, बालिकाओं की शैक्षणिक स्तर तथा स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार तथा उनके अच्छे भविष्य के उद्देश्य से एक अप्रैल 2007 से लाड़ली लक्ष्मी योजना लागू की गई। योजनान्तर्गत बालिका के नाम से, पंजीकरण के समय से लगातार पांच वर्षों तक रूपये 6-6 हजार जमा किये जाते हैं।

बालिका के कक्षा 6 में प्रवेश लेने पर रू 2000, कक्षा 9 वीं में प्रवेश लेने पर 4000, कक्षा 11 वीं में प्रवेश लेने पर 6000 तथा 12वीं कक्षा में प्रवेश लेने पर 6000 ई-पेमेंट के माध्यम से दिए जाते हैं। अंतिम भुगतान के तौर पर 1 लाख रूपए बालिका की आयु 21 वर्ष होने पर किया जाता है। इसमें शर्त जोडी गई है कि बालिका का विवाह 18 वर्ष की आयु के पूर्व न हो।

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