चंडीगढ़,  प्रसिद्ध निर्माता एवं निर्देशक संजय लीला भंसाली की विवादों में घिरी “रानी पद्मावती” पर बनी फिल्म के विरोध की ज्वाला अब हरियाणा तक आ पहुंची है।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और हरियाणा लोकहित पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व गृह राज्य मंत्री गोपाल कांडा ने भी फिल्म का विरोध करते हुए राजपूत समाज के समर्थन में आवाज उठाई है।श्री विज ने आज यहां जारी एक बयान में कहा कि सेंसर बोर्ड को लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुये फिल्म ‘पद्मावती‘ को पास नहीं करना चाहिये।

उन्हाेंने श्री भंसाली पर आरोप लगाया कि उन्हाेंने फिल्म में न केवल रानी पद्मावती के सम्मान से खिलवाड़ किया है बल्कि सती प्रथा के विरोध में बने भारतीय कानून का भी उल्लघंन किया है।उन्हाेंने कहा कि सैंसर बोर्ड को किसी भी तरह से इस फिल्म को रिलीज होने से रोकना चाहिये।इस सम्बंध में उन्होंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री को भी पत्र लिखा है।

उन्होंने कहा कि रानी पद्मावती देश की आन, बान और शान रही हैं जिन्होंने चितौड़ के राजा राणा रतन सिंह के युद्ध में बलिदान होने पर 16 हजार महिलाओं के साथ जौहर कर लिया था।उन्होंने कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ करते हुए ऐसे उच्च चरित्र की रानी को सार्वजनिक तौर पर नाचते हुए दिखाना आपत्तिजनक और भारतीय समाज का अपमान है।

उन्हाेंने कहा कि देश में अब सती प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध है ऐसे में कोई भी व्यक्ति सती प्रथा को बढ़ावा देने वाली फिल्म का प्रदर्शन नहीं कर सकता है और इस सम्बंध में बनाये गये कानून का उल्लंघन है।उन्होंने भंसाली पर एक प्रकार की विचारधारा को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।

उधर श्री कांडा ने केंद्र सरकार फिल्म ‘पद्मावती‘ के रीलिज होने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।उन्हाेंने कहा कि श्री भंसाली ने ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर राजपूत समाज के सम्मान के साथ-साथ समस्त देशवासियों की भावनाओं को भी आहत किया है तथा इससे नारी जाति के सम्मान को ठेस पहुंचेगी।

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