पाकिस्तान के कई शहरों में इन दिनों दंगे भड़के हुए हैं और पुलिस व मजहबी जुनून के प्रदर्शनकारियों की हिंसक झड़पों में कई लोग मारे गये. सैकड़ों बुरी तरह घायल हो गये हैं, जिसमेें पुलिस कर्मी बड़ी तादाद में हैं.

एक चुनाव कानून की शपथ प्रक्रिया में कुछ संशोधन किये गये जिसे वहां उन्मादी आतंकी संगठनों ने राजधानी इस्लामाबाद में चारों तरफ सड़क जाम कर राजधानी को कई दिनों से बंधक बनाये हुए है.

एक याचिका पर पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार व पुलिस को आदेश दिया कि हर हालत में इस्लामाबाद में डाला गया घेरा खत्म किया जाए. सड़कों पर उन्माद की स्थिति में हजारों लोग धरना दिये बैठे थे.

प्रदर्शनकारियों पर पुलिस को भी तितर-बितर करने के लिये भारी बल का प्रयोग करना पड़ा और प्रदर्शनकारी भी भारी संख्या में थे इससे पुलिस व प्रदर्शनकारियों में युद्ध जैसी स्थिति निर्मित हो गई और घंटों इस्लामाबाद की सभी सड़कों पर भारी मारकाट मची रही.

इसके बाद मजहबी जुनून के प्रदर्शन व दंगे पाकिस्तान के कई अन्य शहरों में लाहौर, करांची, हैदराबाद, सरगोधा में भी धार्मिक दंगे भड़क गये हैं. पाकिस्तान ने फौजों को भी स्थिति पर काबू करने बुला लिया है लेकिन अभी वहां फौजें कई कार्यवाही नहीं कर रही हैं.

इससे पाकिस्तान में यह चिंता हो रही है कि इस बिगड़ती हुई हालत का बहाना लेकर फौज पाकिस्तान में सत्ता का तख्ता पलट न कर दे. पाकिस्तान सेना के प्रमुख जनरल कमर जावेद वाजपा जो यूनाईटेड अरब अमीरात (यू.ए.ई.) के दौरे पर गये थे अपना दौरा खत्म करके वापस लौट आये.

यह उग्र स्थिति में चुनाव कानून में जिस संशोधन से पैदा हुई है उन संशोधनों को वापस ले लिया गया है. लेकिन प्रदर्शनकारी इस मांग पर अड़े रहे कि कानून मंत्री जाहिद हमीद उनके पद से इस्तीफा दें.

वे एक-दो दिन तो इस्तीफा न देने पर अड़े रहे और स्थिति के लगातार बिगडऩे से उन्होंने कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्लामाबाद में सभी दफ्तर, बैंक व अन्य संस्थान बंद पड़े हैं.कहीं कोई काम… नहीं हो रहा है. सभी स्कूल कालेज बंद कर दिये गये हैं.

पाकिस्तान में अभी स्थिति काबू से बाहर है. इसके साथ ही पाकिस्तान सरकार राजनैतिक तौर पर भी दबाव में आ गयी है कि अमेरिका ने पाकिस्तान सरकार से कहा है कि वह रिहा कर दिये आतंकी हाफिज सईद को पुन: गिरफ्तार करें अन्यथा वह इसके गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें.

दोनों देशों के परस्पर रिश्तों में दरार आ सकती है और उसकी विश्व समुदाय में भी स्थिति नाजुक हो जाएगी. हाफिज सईद नजरबंदी में था और लाहौर हाईकोर्ट ने नजरबंदी को आगे बढ़ाने की बात नहीं मानी और उसे रिहा करने का हुक्म दिया.

पाकिस्तान सरकार को अब उसे फिर से गिरफ्तार करना दुश्वार हो रहा है और अमेरिका दबाव भी चरम सीमा पर आ गया है. इसी समय वहां आतंकी और धार्मिक संगठनों की वजह से पूरे देश में हिंसक दंगे भड़कते जा रहे हैं. फौज के हस्तक्षेप का खतरा बढ़ता जा रहा है.

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