पाकिस्तान की हालत क्या कहिए जिस देश का प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ खुद ही यह कह रहे हों कि ‘मैं अपना 90 प्रतिशत समय आतंकवाद पर रोक लगाने और बिजली संकट से पार पाने के लिए इन दो मुद्दों पर लगा रहा हूं. इसकी वजह से विकास कार्यों से जुड़े दूसरे मुद्दों पर ध्यान देने के लिये समय ही नहीं बचता. बिजली के बिना और आतंकवाद के चलते कोई देश प्रगति नहीं कर सकता.Ó मियां शरीफ ने अपना मजबूत इरादा जाहिर करते हुए कहा कि पिछले साल 2014 में जून में उत्तरी वजीरिस्तान में शुरू हुआ अभियान देश में आखरी आतंकवादी के खात्मे तक चलता रहेगा.

साथ ही भारत और अफगानिस्तान का यह खुला आरोप है कि उनके देशों में पाकिस्तान की शह और सहायता से आतंकवादी कार्यवाहियां करते जा रहे हैं. अफगानिस्तान मेें पाकिस्तान से आतंकियों की सीधी घुसपैठ हो रही है.
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद भी भारतीय जनता पार्टी के साथ ऐसी सरकार में आ बैठे हैं जो दोनों तरफ साधने में कुछ तो भी विरोधाभासी बातें बोल जाते हैं. हाल ही में सांबा और कठुआ में पाकिस्तानी आतंकवादी ने पुलिस थाना और आर्मी केंद्र पर आत्मघाती हमला किया. इस पर विधानसभा में मुफ्ती कहते हैं कि पाकिस्तान अगर भारत के साथ शांति और दोस्ती चाहता है तो उसे आतंकवाद पर काबू रखना होगा. सांबा और कठुआ में आतंकी हमले शांति प्रक्रिया को बे-पटरी करने की साजिश है. साथ ही यह भी बोल रहे हैं कि सीमा पार के आतंकियों का पाकिस्तान सरकार में संबंध नहीं है. वे ‘नान स्टेट एक्टरÓ हैं. इसी ‘नान स्टेट प्लेयरÓ शब्द पर विधानसभा विपक्ष की कांग्रेस व उमर अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस ने मुफ्ती से स्पष्टïीकरण मांगा और विरोध में सदन से वाकआउट कर गये.

पाकिस्तान के राष्टï्रीय दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र ने मियां शरीफ को बधाई संदेश में कहा है कि मेरा दृढ़ विश्वास है कि हम दोनों देशों के बीच की सभी समस्याओं और मुद्दों को आतंक और हिंसा से मुक्त माहौल में द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है.

लेकिन काश्मीर समस्या में हमेशा दोनों देशों की तरफ से और दूसरे देशों की तरफ से यही बात लगातार की जा रही कि दोनों देश अपनी समस्या आपस की बात से ही सुलझाएं. पाकिस्तान का यह कहना है कि काश्मीर ही एकमात्र ऐसा मुद्दा है जिसे हल किये बिना दोनों देशों के संबंध नहीं सुधर सकते. सवाल यह भी बड़ी उलझन का है कि दोनों देशों के बीच-बीच में युद्ध भी हो गये. कुछ ही दिन की लड़ाई में युद्ध विराम सुलह संधि भी हो गयी. वार्ताओं के कई दौर भी चले. फिर भी सवाल जहां का तहां है कि वार्ता किस पर और क्या हो? मामला जहां बहुत उलझा हुआ है वहीं यह मसला बहुत साफ भी है. आजादी के तुरन्त बाद केवल काश्मीर घाटी में मुस्लिम बाहुल्य होने के कारण मुस्लिम साम्प्रदायवाद पर निर्मित पाकिस्तान के लिए मोहम्मद अली जिन्ना ने उसे पाकिस्तान का भाग बनाना चाहा. लेकिन काश्मीर के भारत में विलय हो जाने से वह संभव नहीं रह गया. मामला संयुक्त राष्टï्र तक पहुंचा और वहीं कुछ देशों द्वारा दोनों पर हावी होने के लिए उसे ऐसा उलझा दिया गया कि वह आज तक दोनों के बीच बाकायदा विभाजन न होते हुए भी दो हिस्सों में विभाजित पड़ा है. संयुक्त राष्ट्र ने यह फार्मूला प्रस्ताव पास किया कि पाकिस्तान पहले काश्मीर से कब्जा हटाये और उसके बाद भारत वहां जनमत संग्रह कराये. पहली शर्त के अनुसार पाकिस्तान ने कब्जा हटाया नहीं तो भारत भी दूसरी शर्त वहां जनमत संग्रह नहीं करा सका. ऐसी परिस्थिति में प्रजातंत्रीय भारत अपने पास वाले जम्मू-काश्मीर-लद्दाख में चुनाव कराकर वहां प्रजातंत्रीय शासन चला रहा है. पाकिस्तान लम्बे अर्से तक बीच-बीच में फौजी तानाशाही में चलता रहा और इन दिनों काश्मीर के लिये आतंकवादी तैयार कर अब स्वयं उसमें फंस उनसे जूझ रहा है. अब नवाज शरीफ और पाकिस्तान की आर्मी पूरी तौर पर आतंकियों को भुगत-निपट रही है.

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