पाकिस्तान द्वारा काश्मीर क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पर अक्सर गोलाबारी होती रहती है. इससे काश्मीर समस्या पर कभी कोई निर्णायक स्थिति आना तो संभव नहीं है- केवल दोनों देशों के बीच तनाव होना या उसका बढऩा ही होता रहता है. ऐसे भी समय बीच-बीच में आते रहते हैं जब नियंत्रण रेखा पर शांति बनी रहती है. पाकिस्तान की सरकार की यह मजबूरी है कि वह उसके देश के कट्टïरपंथियों पर यह जाहिर करती रहे कि वह काश्मीर के मामले में खामोश नहीं है.

सीमा उल्लंघन इस अर्थ में तो नहीं होता है कि पाकिस्तान की सेनायें रेखा पारकर भारत की भूमि पर आ जाएं. उनकी गोलीबारी के दो ही उद्देश्य होते हैं. एक तो जहां गोलाबारी हो रही है वहां भारतीय फौजों का ध्यान खींचना और दूसरी शांत जगहों से भारतीय सीमा आतंकी पहुचाना और दूसरा उद्देश्य आतंकियों को प्रवेश के लिये ‘फायर कवरÓ देना होता है. इसी तरह भेजे गये दो आतंकियों ने जम्मू क्षेत्र में भारत की बी.एस.एफ. काफिले में हमला किया था जिसमें से एक नावेद पकड़ा गया और हमारी कैद में है. इसके 22 दिन बाद 27 अगस्त को भारतीय सेना ने राकियाबाद में दूसरा आतंकी पकड़ा है.
जबसे गत मई में जम्मू-काश्मीर में पी.डब्ल्यू.पी. के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने भारतीय जनता पार्टी से मिलकर वहां साझा सरकार बनायी है, काश्मीर में सीमा पर गोलीबारी और आतंकियों का प्रवेश काफी बढ़ा है. 23-24 अगस्त को दोनों देशों के राष्ट्रीय सलाहकारों की संयुक्त बैठक होने वाली थी वह इसलिए नहीं हो सकी क्योंकि पाकिस्तान इस मसले पर तीसरा पक्ष भारत विरोधी काश्मीरी हुरियत के नेताओं को वार्ता में तीसरा पक्ष बनाना चाहता था. जबकि शिमला समझौते के तहत किसी भी भारत-पाक वार्ता में तीसरा पक्ष नहीं हो सकता. दोनों के मसले द्विपक्षीय हो गये हैं.

काश्मीर में साझा सरकार के बनते ही श्री मुफ्ती ने पाकिस्तान के प्रति अपना रुख शांतिपूर्वक चुनाव के प्रति उसे धन्यवाद देकर किया था. उसके बाद जहां काश्मीर में वहां के अलगाववादी पाकिस्तान का झंडा लहरा रहे हैं, अब इन्हें आई.एस. (इस्लामिक स्टेट) के झंडों के साथ में लहराया जा रहा है.

रूस के शहर उफा में प्रधानमंत्री श्री मोदी व श्री नवाज शरीफ ने दोनों देशों के सुरक्षा सलाहकारों की संयुक्त बैठक करने का तय किया था, लेकिन पाकिस्तान उसे तीसरा पक्ष भी रखने को आमादा था.

काश्मीर के भारत विरोधी इस्लामी नेता दोगली बातें कर रहे हैं. एक तरफ वे जम्मू काश्मीर राज्य को बंगलादेश की तरह एक पृथक राष्टï्र बनाना चाहते हैं और उसमें सभी अंचलों लद्दाख, घाटी व जम्मू के साथ रहने और उसे कश्मीरियत की भावना कहते हैं. दूसरी ओर घाटी से हिंदुओं को डरा-धमका कर इसलिए निकाला गया कि वह घाटी को पूरा मुस्लिम क्षेत्र बना-बता सकें. वहां की समस्या कश्मीरियत नहीं बल्कि खालिस साम्प्रदायिक दुराभाव व अलगाव की है. यदि यह मान लिया जाए कि कश्मीर को स्वतंत्र दर्जा एक समाधान है, वहां इस सत्य को कैसे नकारा जा सकता है कि उस स्थिति में लद्दाख से बौद्ध धर्मियों और जम्मू से हिंदुओं को हटा दिया जायेगा. उनका इरादा साफ है कि जिस तरह हिंदू-मुसलमान आधार पर भारत का विभाजन हुआ. उसी तरह काश्मीर को पूरा मुस्लिम क्षेत्र बनाकर उसे पाकिस्तान में मिलाया जाए. इसी पृष्ठïभूमि से पाकिस्तान की राजनीति चल रही है. यही पाकिस्तानी फौजों व वहां के आतंकवादियों का एजेंडा है.