पाकिस्तान में इन दिनों राजनैतिक तनाव की स्थिति है और राजनेताओं व फौज में द्वन्द होने लगा है. पाकिस्तान की राजनीति में एक अर्से से सैनिक सत्ता और नागरिक सत्ता के आने-जाने का दौर चलता चला आ रहा है. इसका प्रारंभ 50 के दशक में जनरल अय्यूब खान ने शुरु किया था और जनरल याया खान, जनरल जिया खान से होता हुआ जनरल मुशर्रफ तक आया. बीच-बीच में नागरिक सत्ता आती और फौजी तख्ता पलट में जाती भी रही.

अभी हाल ही में पाकिस्तान के भूतपूर्व नागरिक राष्टï्रपति और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता श्री आसिफ अली जरदारी ने भड़ककर ऐसा बयान दिया है कि सेना उन्हें घेर रही है. हालांकि वे इस समय सत्ता में नहीं है और उनकी पार्टी भी सत्ता से बाहर है. सत्ता में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ है और उनकी पार्टी मुस्लिम लीग का संसद में बहुमत है. श्री जरदारी ने सेना के प्रति सहयोग भी जताया है कि वे सेना का साथ देना चाहते क्योंकि देश को भारत से चुनौती है और इस पर क्षोभ व्यक्त किया है कि सेना उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है. प्रधानमंत्री मियां नवाज शरीफ इस टकराव में बीच की मध्यस्थता करते नजर आ रहे हैं. जरदारी के बयान पर उन्होंने कहा है कि जरदारी का सेना के विरुद्ध ऐसा बयान देना उचित नहीं है. आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई आखिरी दौर में है और एकजुटता की जरूरत है. शरीफ ने कहा है कि वे इस मामले में जरदारी से बात करेंगे. श्री जरदारी ने सेना को धमकी दी है कि वे उन फौजी जनरलों का नाम उजागर कर देंगे जो पाकिस्तान के शुरू से लेकर आज तक दोषी रहे हैं. साथ ही उन्होंने एक अतिश्योक्ति की दंभोक्ति भी कर डाली कि उनके एक कॉल पर करांची से लेकर खैबर तक पूरा पाकिस्तान थम जायेगा और जब तक वे चाहे वैसा ही ठप्प रहेगा. पाकिस्तान रेंजर के मेजर जनरल बिलाल अकबर ने कराची में आतंकवाद और अपराधों को नेताओं-अफसरों और गिरोहों की साठगांठ का नतीजा बताया है. जरदारी सिंध के नेता हैं और उन पर छींटाकशी की गयी है.

दूसरी ओर अफगानिस्तान में भी एक विचित्र स्थिति बन गयी है. अभी वहां नागरिक सत्ता शासन में है और तालिबानी पाकिस्तान के साथ-साथ अफगानिस्तान में भी आतंकी गतिविधियां और फौज, पुलिस व सरकारी दफ्तरों पर हमले की कार्यवाहियां करते जा रहे हैं. अफगानिस्तान से रूस से जाने के बाद विभिन्न गुटों में गृह युद्ध छिड़ गया और उसका लाभ उठाकर एक सऊदी अरब का नागरिक ओसामा बिन लादेन वहां तालिबानी संगठन बनाकर शासक बन बैठा था. अमेरिका पर हमले के कारण अमेरिका ने उसे उखाड़ फेंका और बाद में पाकिस्तान में उसे मार डाला लेकिन उसका संगठन तालिबानी वहां फिर सत्ता में आना चाहते हैं. लेकिन अब एक और आतंकी संगठन ‘इस्लामी स्टेटÓ बन गया और अब वह अफगानिस्तान में तालिबानियों को खत्म कर खुद अफगान में सत्ता चाहता है. अब वहां इन दोनों आतंकी संगठनों में ठन गयी है.

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