water_crisisभोपाल/नई दिल्ली,  अभी अप्रैल का महीना शुरू हुआ है लेकिन अभी से ही देश के कई राज्यों में गर्मी और सूखे से हाहाकार मचा है. भीषण सूखे की चपेट में आए बुंदेलखंड में तो पानी पर ही पहरा बैठा दिया गया है.

प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में तो हालात अभी से काफी खराब हो गए हैं. टीकमगढ़ में जामनी नदी पर स्थानीय प्रशासन ने सशस्त्र गार्डों की तैनाती की है. इस डर से कि कहीं से उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा नदी से पानी चोरी न कर लिया जाए. टीकमगढ़ की नगर पालिका के चेयरमैन लक्ष्मी गिरि ने बताया कि किसान पानी न चुरा पाएं, इसलिए हमने लाइसेंसी हथियार शुदा 10 गार्ड तैनात किए हैं.

महाराष्ट्र में स्थिति यह है कि नासिक में गोदावरी नदी का घाट पिछले 139 सालों के इतिहास में पहली बार सूख गया. लातूर में तो पानी की किल्लत के बाद कैदी जेल से शिफ्ट किए जा रहे हैं. वहीं तेलंगाना में जानलेवा साबित हो रही गर्मी 6 अप्रैल तक 66 लोगों की जान जान ले चुकी है.

एक तरफ देश के 9 राज्यों में सूखे से हालात बदतर हैं तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू का बयान सूखे से जूझ रहे लोगों के जख्मों पर और नमक लगाने का काम कर सकता है. दरअसल सूखे को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में वेंकैया नायडू ने कहा कि सूखा पडऩा उनके हाथ में नहीं है. वेंकैया का कहना था कि सूखा क्या हमारे हाथ में है, बारिश आएगा तो ठीक है नहीं तो फिर जो होता है वो हम देखते हैं. प्राकृतिक आपदा को न्यूनतम करने के लिए बीमा एक उपाय है और हमारी सरकार इस पर काम कर रही है.