मध्यप्रदेश में ठंड अच्छी पड़ रही थी. बादल न होने से सारे दिन धूप मिलती थी और रात मौसम के अनुसार ठंडी रहती थी. इससे फसलों को भी खूब बढ़त मिल रही थी और सिंचाई की जरूरत भी महसूस नहीं हो रही थी.

लेकिन एकाएक उत्तरी हिमालयी राज्यों जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड व हिमाचल में भारी हिमपात होने से हवाएं नीचे की राज्यों की तरफ चल पड़ीं. इन सभी राज्यों में मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ तक शीत लहरें आ गयीं और मौसम सुहानी ठंड से चुभने वाली ठंड का हो गया.

अब स्थिति इतनी बिगड़ रही है कि राज्य में फसलों पर पाला पडऩे का खतरा आ पहुंचा है. मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि तापमान में आई भारी गिरावट के चलते महाकौशल, ग्वालियर चम्बल, सागर, रीवा और शहडोल संभागों के जिलों में अगले 24 घंटों में और अधिक तीव्र शीत लहर और पाला पड़ सकता है.

राजधानी के निकट सीहोर व रायसेन जिलों में भी पाला पडऩे के आसार बन गये हैं. अगले दो दिन फसलों के लिए संकट के हो सकते हैं.रायसेन में ओस जम कर बर्फ बन गयी. खेतों में ओस का बर्फ में जम जाना ही पाला होता है. फसलों पर एक बार बर्फ जम जाये तो उसका असर एक सप्ताह बाद पता चलता है.

राज्य में 4 वर्ष पूर्व पाला पड़ा था और उसके ही प्रभाव से फसलों पर इल्ली संकट भी आ गया. राज्य सरकार को किसानों को फसल मुआवजा के रूप में आर्थिक सहायता- राहत पहुंचानी पड़ी थी.

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