भोपाल, आचार्य विद्या सागर महाराज के शिष्य मुनि निर्णय सागर महाराज एवं मुनि पदम सागर महाराज का पिच्छिका परिवर्तन समारोह जवाहर चौक जैन मंदिर प्रांगण में सम्पन्न हुआ.
आचार्य विद्या सागर महाराज के चित्रअनावरण के साथ मुनिद्वय का पाद प्रच्छालन प्रमोद हिमांशु परिवार द्वारा किया गया. कर कमलों में शास्त्र भेंट विनोद जैन द्वारा किया गया. संयम का उपकरण पिच्छिका द्वारा जैन संत साल भर जीव दया के रूप में उपयोग करते हैं. पिच्छिका के परिवर्तन के कार्यक्रम को देखने आज जन सैलाब उमड़ पड़ा था.
प्रवक्ता अशुंल जैन ने बताया कार्यक्रम के साक्षी बनने दिल्ली जयपुर आगरा, मुम्बई सहित प्रदेश के जबलपुर इंदौर, कटनी, बैरसिया, सीहोर, आष्टा, विदिशा सहित अनेक शहरों से श्रद्धालु आये थे. कार्यक्रम में शहर के अनेक मंदिरों की पाठशाला के बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भक्ति नृत्य एवं जीव दया पर्यावरण की रक्षा और बेटी बचाओ के तहत भ्रूण हत्या के खिलाफ संदेश देती हुई नृत्य नाटिकाओं की प्रस्तुती दी गई. इस अवसर पर चार्तुमास में प्रमुख कलश स्थापित करने वाले परिवारों को कलश भेंट किये गए.

इन्हें मिली पुरानी पिच्छिका

मुनि निर्णय सागर महाराज की नवीन पिच्छिका लोकार्पण सभी ब्रहमचारी भैयाओं द्वारा किया गया और महाराज को नवीन पिच्छिका संयम का नियम लेने वाले श्रावकों ने भेंट की तथा पुरानी पिच्छिका ब्रहमचारी वीरेन्द्र भैया के परिवार को प्राप्त हुई. मुनि पदमसागर महाराज की पिच्छिका का लोकार्पण ब्रहमचारणी दीदीयों द्वारा किया गया.

पुरानी पिच्छिका सुनील जैन दिल्ली परिवार को प्राप्त हुई. इस अवसर पर मुनि निर्णय सागर महाराज ने कहा हमारी आत्मा ज्ञान दर्शन का भण्डार है राग द्वेश से जो रिक्त होता है वही आत्मा के दर्शन कर सकता है. दशर्न स्वयं को जानने के लिए होता है प्रदर्शन के लिए नहीं स्वयं को जानने से विश्व को जानने की शक्ति स्वयं प्रकट हो जायेगी.

संयम का संदेश देता है पिच्छिका परिवर्तन

मुनि पदमसागर महाराज ने कहा पिच्छिका परिवर्तन संयम का संदेश देता है. सत्य को बाहर नहीं अपने अंदर खोजो स्वयं को जान लोगे तो संसार को जानने की शक्ति स्वत: मिल जायेगी. इस अवसर पर पंचायत कमेटी के अध्यक्ष प्रमोद हिमांशु ने चार्तुमास में होने वाले आयोजन की जानकारी दी तथा हिमांशु एवं अन्य ट्रस्ट के पदाधिकारीयों ने बाहर से पधारे श्रेष्टी जनों का सम्मान किया.

ये रहे मौजूद- इस अवसर पर प्रमोद, हिमांशु, अशोक भाभा, विनोद एम.पी.टी., सुनील 501, प्रदीप नौहरकला, आलोक पंचरत्न, आदिश जैन, पार्षद सोनु भाभा, सरोज जैन, पंकज जैन, मनोहर लाल टोंग्या, डॉ जितेन्द्र जैन, नरेन्द्र वंदना, दीपक दीप राज, सुनील पटेल, महेन्द्र अजमेरा, डॉ. अजय , अमित, अरविन्द सुपाड़ी सहित अनेक मंदिरों के पदाधिकारी एवं संगठन के कार्यकर्ता मौजूद थे.