P chidambramनई दिल्ली, 31 दिसम्बर. वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने सोमवार को आगामी आम चुनाव में प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी बनाए जाने संबंधी सवालों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, मुझे अपनी सीमाएं मालूम हैं. अगले लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री पद की संभावित दावेदारी पर डीएमके नेता एम. करुणानिधि के समर्थन दिए जाने संबंधी सवाल पर चिदंबरम ने बेहद गंभीर उत्तर दिया. उन्होंने कहा, मैं अपनी सीमाएं जानता हूं और मैं अपनी सीमाओं के अनुरूप जीता और व्यवहार करता हूं.

नकद सब्सिडी मुद्दे को लेकर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने के दौरान चिदंबरम ने कहा कि वे इस सवाल का हल्काफुल्का ढंग से उत्तर देने के लिए भी तैयार बैठे हैं. उन्होंने कहा, मैं जानता हूं कि आप में से कुछ लोग मुझे मूर्ख समझते हैं, लेकिन मैं उतना मूर्ख नहीं हूं जितना आप समझते हैं. एक किताब के विमोचन के मौके पर करुणानिधि ने शनिवार को राजनीति में चिदंबरम के उत्तरोत्तर विकास की चर्चा की थी और पूरे हर्ष के साथ उद्गार व्यक्त किया था, धोती पहनने वाला तमिल को प्रधानमंत्री होना चाहिए. उन्होंने कहा था कि चिदंबरम उनके दिल में बसने वालों में से एक हैं. कुछ और वक्ताओं ने भी चिदंबरम की बड़ी भूमिका की चर्चा की थी. राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा हो रही है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में यदि कांग्रेस विजयी होती है और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं करते हैं तो उस स्थिति में चिदंबरम संभावित पसंद बन कर उभर सकते हैं.

केश सब्सिडी आज से 20 जिलों में लागू
चिदंबरम ने कहा कि सीधे नकदी अंतरण योजना कल से सिर्फ 20 जिलों में शुरु होगी. उन्होंने कहा कि आधार कार्ड नहीं होने पर भी कैश ट्रांसफर की सुविधा लोगों को दी जायेगी. राशन खाद और किरोसिन को कैस सब्सिडी से बाहर रखा गया है.  श्री चिदंबरम ने कहा कि 1 जनवरी से 20 जिलों में, 1 फरवरी से 11 और पहले चरण के आखिर में 1 मार्च से 12 जिलों में डायरेक्ट कैश सब्सिडी योजना लागू हो जाएगी.  चिदंबरम ने यह भी उम्मीद जताई है कि यह योजना गेमचेंजर साबित होगी जिसे 2013 के अंत तक पूरे देश में लागू कर लिया जाएगा.

केरोसीन और डीजल पर सब्सिडी अभी नहीं मिलेगा. कांग्रेस नीत यूपीए सरकार इस कार्यक्रम की सफलता को लेकर प्रतिबद्ध हैं. केंद्र सरकार ने एक साल में इस योजना को पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य है. वित्त मंत्रालय को यकीन है कि थोड़े-मोड़े विलंब के साथ इस व्यवस्था को 2013 के अंत तक पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा. इस योजना से सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर प्रभाव पड़ेगा. गरीबों को पूरा अनाज नहीं मिलेगा और भारतीय खाद्य निगम और किसानों को उनके फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने की योजनाओं पर भी बुरा असर पड़ेगा.

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