assochamनयी दिल्ली,   वाणिज्य एवं उद्योग संगठन एसोचैम ने आज कहा कि बढ़ती गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के बोझ को कम करने के लिए सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के निदेशक मंडलों को सशक्त बनाने के प्रयास करने चाहिये।

उसने कहा कि पीएसबी का सशक्त निदेशकमंडल विशेष इकाई (एसपीवी) के जरिये एनपीए कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस दिशा में बेहतर काम करने के लिए एसपीवी को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग), केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) का डर नहीं होना चाहिये।

संगठन ने कहा कि पीएसबी के बोर्ड को मजबूत बनाने और विशेष इकाई जिसे एसेट रिवाइवल बैंक (एआरबी) कहा जा सकता है को बिना विलंब के लागू किया जाना चाहिये ताकि इस्पात, निर्माण और ऊर्जा जैसे क्षेत्र को दिये गये ऋण के पुनर्गठन के बारे में निर्णय लेने के लिए बैंकों का आत्म विश्वास बढ़ सके।
एसोचैम ने कहा कि चीन में एआरबी जैसे नये संस्थान की शुरुआत की गई है, जिसने बैंकिंग क्षेत्र की समस्याओं का काफी तेजी से समाधान किया है। उसने कहा कि एआरबी का गठन बेहतर ढँग से किया जाना चाहिये ताकि यह कैग, सीवीसी और सीबीआई के दबाव से मुक्त रह सके। पेशेवर बैंकरों के बीच इनका खौफ काफी अधिक है जिससे ये नये ऋण देने के बारे में आसानी से निर्णय नहीं ले पाते हैं।

उसने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश में बैंकों के कुल ऋण पोर्टफोलियो में बढ़ोतरी करने की जरूरत है। प्रत्येक वर्ष 12 हजार से 14 हजार करोड़ रुपये के जोखिम वाले ऋण पर हाय तौबा नहीं मचाया जाना चाहिये। इसे कारोबार के सामान्य जोखिम के रूप में देखना चाहिए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2000 में चीन में सरकारी बैंकों का एनपीए 400 अरब डॉलर पर पहुँच गया था।

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