नई दिल्ली,  केंद्र सरकार ने साफ किया है कि पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के जरिए किए जाने वाले निवेश के नियम सख्त और बेहतर है. इनमें किसी भी बदलाव की जरुरत नहीं है

यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से जुलाई में काले धन पर नियुक्त एसआईटी ने पूंजी बाजार नियामक सेबी से कहा है कि वे पी-नोट्स पर अपने नियमनों की समीक्षा करें और इसके उपयोक्ताओं की पहचान करें.
वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा फिलहाल पी-नोट धारकों की पहचान संबंधी सूचना प्रणाली और जिस तरह हम इसका अनुपालन करते हैं. दरअसल, यह समझने के लिए काफी अच्छा है और सख्त है कि निवेशक कौन हैं और क्या पी-नोट्स के जरिए कारोबार करने वाले संस्थान वैध हैं. जयंत सिन्हा ने कहा कि पूंजी बाजार नियामक सेबी ने पिछले कुछ सालों में पी-नोट्स से जुड़े अपने ग्राहक को जानो मानदंड को मजबूत किया है. कुल मिलाकर, ढांचा काफी सुदृढ़ है. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मनी लॉड्ररिंग के लिए पी-नोट्स में धोखाधड़ी की आशंका पर चिंता जाहिर की थी.

दरअसल, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जुलाई में कहा था कि सरकार पी-नोट्स के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई के मामले में विदेशी निवेश पर असर के संबंध में सचेत है.पी-नोट्स, सेबी के साथ पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से अन्य विदेशी निवेशकों को जारी किया जाता है जो बगैर सीधे पंजीकरण के भारतीय बाजार में निवेश करना चाहते हैं. यह लोकप्रिय योजना है क्योंकि यह भारतीय बाजारों में निवेश का आसान और सस्ता जरिया है.

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