नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल इनवेस्टिगेटिव टीम (एसआईटी) की पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) पर सख्ती की सिफारिशों को लेकर सरकार डैमेज कंट्रोल में जुट गई है. कुछ विदेशी निवेशक पी-नोट्स के जरिये शेयर बाजार में पैसा लगाना पसंद करते हैं.

पी-नोट्स पर सरकार के भरोसे के बावजूद सोमवार को शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आई. हालांकि, इसके लिए काफी हद तक चीन का शेयर बाजार जिम्मेदार था, जिसमें सोमवार को पिछले 8 साल में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट आई. चीन में इनवेस्टर्स को डर है कि सरकार ने बाजार को सपोर्ट करने के लिए जो उपाय किए हैं, उन्हें वापस लिया जा सकता है.

इधर, भारत में पी-नोट्स मामले पर फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने कहा, च्इस मामले में सरकार का क्या रुख रहेगा, इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. हम ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे, जिससे देश में इनवेस्टमेंट एनवायरमेंट पर बुरा असर पड़ेगा.ज् ब्लैकमनी पर बनी एसआईटी ने अपनी तीसरी रिपोर्ट में पी-नोट्स के जरिये शेयर बाजार में निवेश पर सख्ती की सिफारिश की है. इसे लेकर जेटली ने फॉरेन इनवेस्टर्स की फिक्र दूर करने की कोशिश की.

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शुक्रवार को शेयर बाजार बंद होने के बाद सौंपी थी. इसमें उसने सेबी से ऐसे नियम बनाने की सिफारिश की थी, जिससे पी-नोट्स के रियल बेनेफिशियरी का पता लग सके. उसने इशारा किया था कि कुछ टैक्स हेवेन से पी-नोट्स के जरिये शेयर बाजार में काफी पैसा आ रहा है. पी-नोट्स डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं, जिन्हें फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स या सब-एकाउंट्स या एसोसिएट्स भारतीय सिक्योरिटीज को आधार बनाकर जारी करते हैं. यह उन विदेशी निवेशकों के बीच पॉपुलर है, जो भारत के सख्त डिस्क्लोजर नॉर्म्स को पूरा नहीं करना चाहते. इस वजह से ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि पी-नोट्स का इस्तेमाल देश में काला धन वापस लाने के लिए किया जा रहा है.

एसआईटी की सिफारिशों के चलते कड़े कदम उठाए जाने के डर से सोमवार को बीएसई का बेंचमार्क इंडेक्स 550.93 प्वाइंट्स यानी करीब 2 पर्सेंट गिरकर 27,561.38 पर आ गया. हालांकि, रेवेन्यू सेक्रेटरी शक्तिकांत दास ने कहा कि सरकार एसआईटी की सिफारिशों पर सभी स्टेकहोल्डर्स की राय लेने के बाद ही कोई फैसला करेगी. उन्होंने बताया, च्अभी घबराने की जरूरत नहीं है. हम सेबी, आरबीआई और संबंधित संस्थानों से मशविरा करेंगे. मार्केट को पी-नोट्स को लेकर रिएक्ट करने की जरूरत नहीं है.

एसआईटी की सिफारिशें सरकार की ब्लैकमनी पर सख्ती करने की कोशिशों के बीच आई हैं. सरकार ने ब्लैकमनी को कम करने के लिए नया कानून भी बनाया है, जिसमें टैक्स चोरों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है.कुछ साल पहले तक पी-नोट्स का कंट्रीब्यूशन कुल विदेशी निवेश में 50 पर्सेंट तक था, लेकिन डिस्क्लोजर नॉर्म्स पर सेबी के सख्ती करने के बाद से इसमें लगातार गिरावट आई है.

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