मध्यप्रदेश में कई बार यह चर्चा उठती रही है कि राज्य के बड़े नगरों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की जाए और आई.ए.एस. लाबी उसका इसलिये विरोध करती रही है कि इससे जिलों में कलेक्टर सिर्फ राजस्व अधिकारी के रूप में कलेक्टर ही रह जायेंगे और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का पद पुलिस कमिश्नर में निहित हो जायेगा. आई.ए.एस. कलेक्टर के पद को अपनी सेवा की बुनियाद व जड़ मानते हैं.

जब वे पहली बार कलेक्टर बनाये जाते हैं उसी दिन वे यह मानते हैं कि वे वास्तव में आई.ए.एस. हैं और यहीं से उनकी आगे पदोन्नतियों के नाम-दाम व शान बढ़ते हैं.

वैसे इस समय महाराष्ट्र व दक्षिण राज्यों में उनके राज्य में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कर दी है. लेकिन उत्तरप्रदेश में एस.एस.पी. प्रणाली है जिसे मध्यप्रदेश ने अपनाया है. लेकिन अब फिर पुलिस कमिश्नर बनाने के बारे में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने संकेत देकर मामला फिर विचार में आ गया है.

जैसे केन्द्र सरकार ने जी.एस.टी. लागू करके देश में एक टैक्स, एक बाजार एक मूल्य बनाने की पहल की है. उसी तरह उसे देश के प्रशासन में केन्द्र व सभी राज्यों में एक सी शासन प्रणाली भी लागू करनी चाहिए.

अभी पंजाब व आसाम में जिला अधिकारी को डिप्टी कमिश्नर कहा जाता है- बाकी जगह कलेक्टर व डी.एम. है. कहीं पुलिस कमिश्नर है- तो कहींं एस.एस.पी. प्रणाली है. अब केन्द्र को पहल करके पूरे देश में एक सी शासन-प्रशासन व्यवस्था लागू करना चाहिए.

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