डीपीसी का कहना पद से हटाया, जबकि गणतंत्र दिवस पर उन्हीं ने फहराया झंडा

नवभारत न्यूज सागर,

शासकीय शालाओ में अध्ययनरत बच्चो को निशुल्क वितरण के लिए ने वाली किताबों के घोटाले की जांच में बीआरसी पर गाज गिरी है।

मामले में डीपीसी का कहना है कि बीआरसी को पद से हटा दिया गया है। जबकि विभागीय सूत्रो का कहना है कि गणतंत्र दिवस पर दोषी पाए गए बीआरसी संतोष अहिरवार ने ही झंडा वंदन किया। उल्लेखनीय है कि प्रदेश शासन द्वारा कक्षा 1 से 8वीं तक के बच्चों के लिए निशुल्क पाठयपुस्तको का वितरण शालाओ में किया जाता है।

सागर ब्लाक के अंतर्गत सागर बीआरसी में ब्लाक के शासकीय शालाओ में अध्ययनरत बच्चों को निशुल्क वितरण के लिए आई पुस्तकों का घोटाला सामने आया था। पिछले वर्ष के अंतिम माह में जब बीएसी राजीव जैन ने पुस्तक वितरण के लिए हाल खोला तो वहां बडी संख्या में पुस्तके कम पाई गई थी।

मामले की जानकारी उन्होंने डीपीसी एचपी कुर्मी को दी। इसके साथ ही बीएसी श्री जैन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुस्तक गायब होने के चलते गोपालगंज थाने में भी एक शिकायती आवेदन दिया था। मामला मीडिया में आने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के मौखिक निर्देश पर बाद में इस शिकायत को वापस ले लिया गया गया था।

नवभारत द्वारा मामले का खुलासा किए जाने के बाद डीपीसी श्री कुर्मी द्वारा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी। जिसमें एपीसी एचसी स्वर्णकार, आरके मिश्रा और केसली बीआरओ राजकुमार दीवान शामिल थे।

जांच समिति ने मामले की जांच की तो बीआरसी श्री अहिरवार को इस पुस्तक घोटाले में शामिल पाया।बताया जाता है कि बीआरसी श्री अहिरवार ने बच्चो की निशुल्क वितरण के लिए आई नई पुस्तको सहित बची हुई पुरानी पुस्तकों को रद्दी में बिकवा दिया था। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट डीपीसी एचपी कुर्मी को करीब एक माह पूर्व सौपी थी।

मामले में डीपीसी ने रिपोर्ट आने के बाद भी उसको लटकाए रखा गया। इसबारे में जब आज डीपीसी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस पुस्तक घोटाले में दोषी पाए गए बीआरसी श्री अहिरवार पर 24 हजार पंाच सौ रूपए की रिकवरी निकाली गई है जो उनसे वसूली जाएगी। साथ ही उन्हें पद से हटाकर डीईओ कार्यालय में अटैच किया गया है।

हालाकि विभागीय सूत्रो के अनुसार गणतंत्र दिवस तक डीपीसी द्वारा दोषी पाए गए बीआरसी के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की गई थी। सूत्र बताते है कि इसी के चलते गरीब बच्चो की पुस्तको में घोटाले के दोषी बीआरसी द्वारा ही गणतंत्र दिवस पर कार्यालय में झंडा रोहण भी किया गया। बहरहाल नवभारत द्वारा लगातार मामले को उठाने के बाद अंतत: अब डीपीसी ने बीआरसी को पद से हटा दिया है।