झाबुआ जिले के पेटलावद शहर में जो विस्फोटक त्रासदी हुई है उसमें अधिकांश बातें जांच से पहले ही स्वयं सिद्ध हैं. बीच शहर में एक ऐसी दुकान खुले आम चल रही थी जहां विस्फोटक रखे जाते थे और वहीं से बिक्री होती है.

विस्फोटक सामग्री के निर्माण, यातायात करने, गोदाम व्यवस्था व बिक्री केंद्रों के बारे में अनेकों कानून बने हुए हैं. इन कानूनों को लागू करने के लिए जिला व राज्य प्रशासन के अलावा विस्फोटक सामग्रियों के लिये अलग से विभाग अधिकारी व कर्मचारी रहते हैं. इन पर जो भी कानून बने हैं उन्हें कड़ा कानून कहा जाता है. पेटलावद में बीच शहर में दुकान होने से ही यह दुर्घटना हुई.

आज इस बात का कोई अर्थ नहीं है कि वहां नहीं होनी थी. उस दुकान का मालिक सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी के व्यापारी प्रकोष्ठï का नेता है. वह स्थानीय स्तर पर पुलिस इन्सपेक्टर, पुलिस व प्रशासन के एस.डी.ओ. के निकट संबंध में रहता है. इसलिये सब चलता है की कार्य प्रणाली मेें ही यह सब चलता रहा. विस्फोट के दो ही कारण सरसरी तौर पर नजर आ रहे हैं. एक पर तो वहां शॉर्ट सर्किट हो गया या इन दिनों काफी गर्मी भी पड़ रही है उससे वहां विस्फोटक स्थिति बन गयी थी.
जितने भी एक्सप्लोसिव एक्ट बने हुए हैं उसके अनुसार कोई भी नियमों का परिपालन नहीं हो रहा था. इसमें आतंकी कार्यवाही जैसी भी कोई बात होने की संभावना नहीं है.

अब यह कहा जा रहा है कि पूरे प्रदेश में विस्फोटकों के कारोबार की जांच की जानी चाहिये. इस समय प्रचलन में सबसे ज्यादा काम में आने वाली विस्फोटक सामग्री ”रसोई गैस” है. शहर के बाहर के गोदामों में रखी जाती है लेकिन हर घर में मौजूद है. इनमें कभी-सभी दुर्घटनायें भी होती हैं. शहरों व बाहरी सड़कों के किनारे बने सभी पेट्रोल पम्प विस्फोटक श्रेणी में होते हैं. उन्हें शहरों व घरों से बाहर नहीं किया जा सकता और इसकी जरूरत भी महसूस कभी नहीं की जा सकती.

इस घटना से एक बात और भी ज्यादा संगीन मालूम हो रही है कि पेटलावद में जिसके नाम से लाइसेंस था वह 10 साल पहले डिटोनेटर फटने से मारा जा चुका है और उसका भाई व परिवारजन उस धंधे को उसी के नाम से चलाये जा रहे थे. इस मामले में जितने कड़े कानून हैं उसमें उतनी ही ज्यादा ढिलाई यहां हुई और संभवत: हर जगह हो रही है. खदानों के कामों में ऐसे विस्फोटक हर जगह काम में आते हैं और इस संबंध में वह सभी सावधानियां बरतनी ही चाहिये, जिनके बारे में सूक्ष्म से सूक्ष्म बातों पर कानूनों में निर्देशात्मक प्रावधान किये गये हैं.

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