पेट्रोल-डीजल पर सेस का अतिरिक्त कराधान कहने को तो 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ा है लेकिन ट्रांसपोर्ट के बड़े वाहन ट्रक-बसें भारी अन्य बड़े वाहन फुल टेंक भर के चलते हैं. इस सेस का अर्थ हो गया कि माल ढुलाई और सड़क से यात्री आवागमन महंगा हो जायेगा.

ट्रांसपोर्ट भाड़ा बढऩे का अर्थ होता है सभी वस्तुओं के भाव बढ़ जाना. राज्य सरकार ने सेस बढ़ाकर राज्य में सभी वस्तुओं के भाव बढ़ाये हैं. इससें सरकार को तो 200 करोड़ रुपये मिलेंगे. लेकिन लोगों की जेबों से महंगाई के कारण 1000 करोड़ रुपये निकल जायेंगे.

जी.एस.टी. से पूरे देश में एक राष्ट्रीय बाजार और वस्तुओं का एक मूल्य की बात तो कही जा रही है लेकिन जब तक पेट्रोल-डीजल के भाव कम नहीं होंगे तब तक जी.एस.टी. का उद्देश्य ही पूरा नहीं होगा. मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल सबसे ज्यादा महंगे है. यहां 50 पैसे प्रति लीटर सेस कतई नहीं होना चाहिये.

सरकार 2018 के चुनाव वर्ष में विकास को जमीन पर दिखाने के लिये बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण का काम करना चाहती है. उसके लिये लोक निर्माण विभाग ने 2 हजार करोड़ रुपये की जरुरत बताई है. भाजपा सरकार का चुनाव जीतने का प्रयास जनता को काफी भारी व महंगा पड़ रहा है.

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