प्रदेश सरकार ने प्रति लीटर 50 पैसे लगाया सेस

  • अधोसंरचना विकास के लिए जुटेंगे 200 करोड़
  • मप्र मोटर स्पीड अध्यादेश 2018 को दी मंजूरी

नवभारत न्यूज  भोपाल,

नए साल में सरकार से मप्र की लगभग 8 करोड़ की आबादी को महंगाई की मार तोहफे में मिली है. दरअसल लगभग 3 महीने पहले पेट्रोल-डीजल पर वैट घटाने वाली राज्य की सरकार अधोसंरचना विकास के लिए अब 50 पैसे सेस लेने जा रही है.

बुधवार को शिवराज कैबिनेट ने इसके मद्देनजर लाए गए मप्र मोटर स्पीड़ अध्यादेश 2018 को मंजूर कर लिया है. हालांकि इसके प्रभावी होने की तिथि अभी सरकार ने नही बताई है. बावजूद इसके कहा जा रहा है कि हर साल लगभग 200 करोड़ रुपए सरकार को मिलेंगे.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक की जानकारी देते हुए संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि इस राशि को अधोसंरचना विकास पर खर्च किया जाएगा. जिसमें सड़को का निर्माण और मरम्मत प्रमुख रूप से शामिल है.

सरकार के इस निर्णय का विरोध शुरू हो गया है. कांग्रेस की जिला इकाई ने सरकार का पुतला जलाते हुए अपना आक्रोश जताया और डीजल पेट्रोल को जीएसटी में लाने की माग की है. जबकि नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने नाराजगी जाहिर करते हुए इस निर्णय को जन विरोधी बताया है.

इसके अलावा अन्य एक निर्णय मे सांसदों (मप्र के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों) को स्वेच्छानुदान के रूप में प्रत्येक को 25 लाख रुपए देने के प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया. यह पैसा सांसद अपने क्षेत्र में खर्च करेंगे.

बढ़ेगी महंगाई

इस निर्णय को महंगाई बढ़ाने वाला बताया जाता है. क्योंकि डीजल पेट्रोल पर सेस लगने के बाद इनका असर परिवहन भाड़े पर बढ़ोतरी के रूप में दिखाई देगा. माना जा रहा है कि इसके बाद भाड़े में लगभग 15 पैसे प्रति किलो मीटर की दर से बढ़ोतरी हो जाएगी. यह बता दे कि मध्य प्रदेश के पास समुद्र तट नहीं होने के कारण अधिकतर परिवहन व्यवस्था सड़क मार्ग पर निर्भर है.

इसलिए पड़ी जरूरत

सरकार के इस निर्णय को चुनावी साल में आर्थिक प्रबंधन से जोड़कर देखा जाता है. बताया जाता है कि पीडब्लूडी की बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधायकों की मांग को देखते हुए सड़क निर्माण के आदेश दिए थे.

लेकिन कर्जे पर चल रही सरकार के सामने विभाग ने लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की जरूरत बताई थी. लिहाजा चुनाव के ठीक पहले सड़क निर्माण को लेकर जनता की नाराजगी दूर करने के प्रयासों के तहत यह नया कर अधिरोपित कर दिया है.

यह बात अलग है कि जरूरत के मुताबिक सरकार को मिलने वाली यह राशि कम है. लेकिन इसके बाद सरकार को अधोसंरचना मद पर होने वाले खर्च की भरपाई में काफी मदद मिलेगी.

तब मिली थी सराहना

13 अक्टूबर 2017 को ही केंद्र सरकार के आग्रह पर मप्र सरकार ने डीजल पर 5 फीसदी और पेट्रोल पर 3 प्रतिशत वैट घटाकर जनता की सराहना बटोरी थी. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे जनता के पक्ष में फैसला बताया था. लेकिन इसकेेेे बाद भी मध्य प्रदेश सरकार पेट्रोल पर अतिरिक्त कर भी ले रही है.

यह वर्तमान में 4 रुपए प्रति लीटर है. यह भी देश के दूसरे राज्यों के मुकाबले अभी भी सबसे ज्यादा है.
हालांकि इसके बाद सरकार ने 2 हजार करोड़ का घाटा होना बताया गया है.