अरब राष्टï्रों में इस्लामी स्टेट इस्लाम का जुनून पैदा कर पेट्रोल के तेल कुओं की व्यापक कब्जा करने के लिये वह सभी इन राष्टï्रों पर कब्जा करना चाहता है. इस मामले में तुर्की उसका सबसे बड़ा मददगार है. उसने तेल टैंकर को नष्टï करने आ रहे रूसी फाइटर प्लेन को भी मार गिराया. इन राष्टï्रों के आम मुसलमान, इस्लाम के जुनून में इनके साथ जुड़ रहे है और वह तेल राष्टï्रों पर कब्जा कर नया राष्टï्र बनाना चाह रहा है.

ओसामा बिन लादेन मूल रूप से सऊदी नागरिक था. उसने अफगानिस्तान में शादी कर वहां अपनी रिश्तेदारी में उस राष्टï्र पर इस्लाम के नाम पर कब्जा जमाया. जबकि उसका मूल उद्देश्य यह था कि संसार में सबसे ज्यादा अफीम अफगानिस्तान में ही पैदा होती है और वह ड्रग के बाजार में से भारी कमाई कर रहा था. अलकायदा और इस्लामी स्टेट दोनों इस्लाम का नाम पर अपने तेल व अफीम के व्यापार के लिये इस्तेमाल कर रहे हैं. अरब राष्टï्रों में सऊदी अरब सबसे बड़ा तेल उत्पादक राष्टï्र है. अमेरिका व भारत सहित कई देशों की अधिकांश क्रूड आइल की जरूरत सऊदी अरब ही पूरी करता है. उसके बाद ईरान व इराक की गणना होती है.

इस समय सऊदी अरब ही संसार के पश्चिमी राष्टï्र, भारत व अन्य राष्टï्रों के साथ जुड़ गया है जो इस्लामी स्टेट को मिटा देने के लिये युद्ध कर रहे हैं. सऊदी अरब जान गया है कि इस्लामी स्टेट अन्य अरब राष्टï्रों पर कब्जा कर अपने मूल उद्देश्य से सऊदी अरब पर ही कब्जा करने आयेगा. इस समय सभी राष्टï्र यह समझ गये हैं कि अरब राष्टï्रों में इस्लामी आतंक की आपदा कभी भी यह रूप ले सकती है कि पेट्रो क्रूड की सप्लाई रुक जाए. यह संकट उन अरब राष्टï्रों के लिये भी उतना ही भयंकर होगा कि उनका पेट्रो क्रूड का व्यापार ही ठप्प हो जायेगा जो उनकी पूरी अर्थव्यवस्था व संपन्नता है. सऊदी अरब और भारत ने अभी हाल ही प्रधानमंत्री श्री मोदी की सऊदी अरब यात्रा में यह अनुबंध किया है कि सऊदी अरब भारत में उसके पेट्रो क्रूड का भंडारण करेगा और यहीं से अन्य देशों में उसकी सप्लाई करेगा. वह भारत में रिफायनरी में भी विनिवेश करेगा. सऊदी अरब अब भारत में अपना आइल डिपो बनाने जा रहा है.

इसकी तैयारी में भारत में इंडियन ऑइल, ओ.एन.जी.सी. हिंदुस्तान पेट्रोलियम व भारत पेट्रोलियम सभी बड़ी आइल कम्पनियां रिफायनरी क्षमता बढ़ाने के लिए 18,000 करोड़ रुपये का भारी निवेश करने जा रही है. ये कम्पनियां महाराष्टï्र में भारत की सबसे बड़ी ऑइल रिफायनरी स्थापित करने जा रहीे हैं. जिसकी क्षमता 60 मिलियन टन प्रतिवर्ष की होगी. इस समय भारत की कुल रिफायनरी 215 मिलीटन है. सन् 2040 तक भारत के पेट्रो जरूरत प्रति वर्ष 500 मिलीयन टन होने जा रही है. इसलिये भारत को तेल क्षेत्र में 62 बिलियन डालर का अतिरिक्त निवेश करना होगा.

वर्तमान में गुजरात, बरुनी, मथुरा व पानीपत की आइल रिफायनरियों का विस्तारण प्रस्तावित है. मध्यप्रदेश में अरब राष्टï्र ओमान के सहयोग से बीना के पास आगासोद में आधुनिक रिफायनरी काम कर रही है.

राजनैतिक स्थिरता और प्रजातंत्रीय शासन के कारण सऊदी अरब ने करार कर लिया है कि वह भारत को अपने पेट्रो व्यापार का अतिरिक्त केंद्र बनायेगा. यह भारत के हित में भी है कि उसे हर समय पेट्रो क्रूड की सप्लाई सुनिश्चित होगी. आने वाले समय में भारत आइल रिफायनरी उद्योग का विश्व में केंद्र बन जायेगा. रिलायंस जैसी निजी कम्पनियां भी रिफायनरी के क्षेत्र में सक्रिय हो गयी हैं.