भारत भी उन विकसित देशों में शामिल हो गया है जहां कच्चे तेल (पेट्रो क्रूड) का भंडारण किया जायेगा. यह वैश्विक उठापटक और क्रूड सप्लाई में रुकावट की आपात स्थिति में नियमित सप्लाई की गारंटी भी होगी.

अभी अमेरिका बहुत बड़े पैमाने पर उसके देश में कृत्रिम गहरे कुंए बनाकर उनमें पेट्रो क्रूड का भारी स्टाक किसी भी आकस्मिक स्थिति से आसानी से निपट लेने के लिये हमेशा रखता है. उसका आधार यह बनाया गया है कि युद्ध की स्थिति में वह कितने दिन, महीने या साल बिना क्रूड आपात के लिये टिक सकता है. उसके तटों पर प्राकृतिक तेल जमीन व समुद्र में है लेकिन वह उसका दोहन नहीं कर रहा है और उसकी दीर्घकालीन योजना है कि जब कभी पेट्रो क्रूड अन्य जगहों देशों में खत्म होने का आयेगा उस वक्त वह इसका दोहन करेगा. उस राष्टï्र से सटे हुए देश मैक्सिको के समुद्री तट में पेट्रो क्रूड का दोहन हो रहा है. अमेरिका आर्थिक दृष्टिï से संपन्न राष्टï्र है इसलिये वह अभी इसे खरीदकर अपना काम बड़ी सुगमता से चलाता है. तेल के व्यापार में राष्टï्रों के बीच विनिमय की मुद्दा अमेरिकी डालर ही है.

कुछ वर्षों पहले अमेरिका ने राजनैतिक उठापटक में इरान से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाये थे. अमेरिका सहित कई राष्टï्रों ने उससे क्रूड खरीदना बंद कर दिया था और इरान पर भारी आर्थिक संकट आ गया था. उस समय भारत ने अमेरिकी दबाव व प्रतिबंध को न मानते हुए ईरान से पेट्रो क्रूड खरीदना जारी रखा और उसका भुगतान भी दोनों देशों ने उनकी ही मुद्रा दीनार व रुपये में करने लगे और डालर को छोड़ दिया. अरब राष्टï्रों में इससे भारत की प्रतिष्ठा बहुत बढ़ गयी कि यह देश किसी बड़े राष्टï्र के दबाव में नहीं आता है और इसकी अपनी हैसियत, हस्ती और स्वाभिमान है. ऐसी दृढ़ता दिखाने का एक बड़ा लाभ भारत को यह हुआ है कि अब एक अरब राष्टï्र संयुक्त अरब अमीरात ने भारत में उसके कच्चे तेल का भंडारण करने का भारत सरकार से समझौता किया है. यह ऐसा परस्पर हित का समझौता है कि इससे दोनों देशों के आर्थिक हित का संरक्षण किया गया है. संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों के पास तेल के कुएं तो बहुत हैं पर जमीन कम है. अमीरात भारत मेें अपने स्टाक का भंडारण आसानी से कर सकेगा और पास के देशों श्रीलंका और दक्षिण पूर्व के राष्टï्रों तथा चीन तक अपना तेल व्यापार फैला सकता है. भारत की मरचेंट नेवी को भी समुद्री ऑइल टैंकरों का बड़ा धंधा रोजगार मिल जायेगा. दोनों देशों के करार में यह तय हुआ है कि अमीरात 5 लाख टन पेट्रो क्रूड नि:शुल्क देगा. इससे यह भी माना जा सकता है कि वह भारत को इस तरह भंडारण शुल्क (गोडाऊन चार्ज) दे रहा है. भारत में अमीरात जो भी स्टाक करेगा उसका दो तिहाई भाग भारत को नि:शुल्क मिलेगा.

अभी भारत अपनी जरूरत का 79 प्रतिशत भाग की पूर्ति पेट्रो क्रूड के आयात से करता है. इसमें 8 प्रतिशत भाग अमीरात से आता है. इस आयात में वृद्धि की जायेगी. सन् 16-17 में एक करोड़ 61 लाख टन की खरीद होगी और इसमें 25 लाख टन तेल और अधिक अमीरात से लिया जायेगा. अमीरात का क्रूड भंडारण आंध्र व कर्नाटक राज्य में
किया जायेगा.

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी गत वर्ष अगस्त में अमीरात की यात्रा पर गये थे और दोनों देश करीब आये थे. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में अमीरात में 75 अरब डालर की प्रतिबद्धता जताई है. भारत ने उसे पेट्रो रिफायनरी, पेट्रो रसायन, ऑइल पाइप लाइन और एल.एन.जी टर्मिनल में निवेश का सुझाव दिया है. अरब के सभी तेल उत्पादक देश भारत को बड़े भरोसे व हिम्मत हौसले का देश मानते हुए उसके काफी निकट आ रहे हैं. अमीरात जैसे समझौते अन्य अरब देशों से भी होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है.

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