प्याज एक लंबे समय से किसानों और उपभोक्ताओं के बीच में दर्द और सिरदर्द बन रही है और इन दोनों के बीच में सरकारे कभी किसानों की और कभी उपभोक्ताओं की हमदर्द बनती रही. प्याज भी कुछ क्रमवार चलती रही. एक साल कम हो गयी तो दूसरे साल भरपूर हो गयी. जब कम हुई तो 80-100 किलो तक बिक गयी. विदेशों से आयात तक करना पड़ा.

इस साल प्याज 20 पैसे किलो बिक गयी. इस पर पूरा माल नहीं उठा तो किसानों ने प्याज के मंडियों में ही फेंक दी और खेतों में भी उसे उखाड़ा नहीं. आज हालत यह है कि यदि खेत में ही उखाड़ा जाये तो उसकी मजदूरी किसानों को जेब से देनी पड़ रही है.

हो यह रहा है कि जिस साल प्याज ज्यादा महंगी हो जाती है तो आने वाले साल में सभी किसान प्याज लगा देते हैं और यह इतनी हो जाती है और यह हालत हो जाती है जो इस साल इस समय हो रही है.प्याज भी अजब गजब बना हुआ है- काटो तो आंसू आ जाते हैं, भाव चढ़े तो उपभोक्ता रोये और भाव गिरे तो किसान रोये.

इस चक्कर में सरकार ही सबसे ज्यादा चक्कर में आ जाती है कि यह प्याज कौन सी और कैसी समस्या है. लेकिन इस बार सरकार ने उसका जो समाधान निकाला है वही एकमात्र इसका समाधान है और उसके अलावा और कुछ और हो ही नहीं सकता.

यूपीए सरकार के खाद्य मंत्री श्री शरद पवार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि प्याज-आलू-लहसुन ये सब्जियों में आते हैं और पेरेशेबिल (जल्दी खराब हो जाने वाले) हैं इसलिये सरकार इनके बारे में कुछ नहीं कर सकती- वह इसे नहीं खरीदेगी. श्री पवार के दो टूक जवाब से उपभोक्ता और किसान दोनों टूट गये. अब सरकार का यह फैसला है कि सरकार दोनों ही स्थितियों में (अभाव और भराव) प्याज खरीदेगी और उसका बफर स्टाक बनायेगी.

जिस साल प्याज कम होगी और भाव चढ़ेंगे तो सरकार बाजार में स्टाक उतार कर भावों को नियंत्रित रखेगी. जिस साल प्याज खूब होगी और भाव कम होंगे तो वह किसानों से खरीदकर बफर स्टाक में रख लेगी और भावों को जरूरत से ज्यादा गिरने नहीं देगी.
पिछले साल 2015 में प्याज 80-90 रु. किलो बिका तो और उसके बाद ही सरकार ने 8000 टन प्याज खरीद कर उसका बफरस्टाक बनाया.

भाव चढऩे के बाद खरीदने से उपभोक्ता को ज्यादा राहत नहीं मिल सकी. इसलिये सरकार ने यह तय किया है कि वह फसल आते ही चालू भावों या उतार-चढ़ाव से पहले ही प्याज बफर स्टाक के लिये खरीद लेगी. अभी जब प्याज बाजार में 20 पैसे किलो तक मारा-मारा फिर रहा है सरकार की नोडल एजेंसी नाफेड (नेशनल मार्केटिंग फेडरेशन) ने 10 रुपये किलो पर 20,000 टन प्याज खरीदा है. इस रबी सीजन 15,000 टन प्याज सरकार खरीदने जा रही है और बफर स्टाक में रखेगी.

उपभोक्ता इसे निश्चित ही समझ ले कि इस साल प्याज की अधिकता से किसानों की जो दुर्दशा हुई है वह आगे प्याज नहीं बोयेगा और अगले साल प्याज के भाव फिर आसमान छूने लगेंगे. सरकार भी बफर स्टाक बना कर इस बात के लिये तैयार बैठी है कि अगले साल भाव चढऩा ही है उस समय इस साल का प्याज उपभोक्ताओं के हित में बाजार में उतार दिया जायेगा.

लगता तो है कि मोदी सरकार के खाद्य मंत्री श्री रामविलास पासवान ने समाधान निकाल तो लिया है. एक दो साल आगे प्याज की उठापटक से इस प्रयोग का परीक्षण भी हो जायेगा. उम्मीद तो यही हो रही है कि अब प्याज दर्द-सरदर्द नहीं रहेगी सरकार हमदर्द बन कर आगे आ गयी है.

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