onionमुंबई,  सौराष्ट्र क्षेत्र से नए सीजन का प्याज दो सप्ताह में मंडियों में आने लगेगा, जिससे इसकी कीमतों में कम से कम 20 फीसदी गिरावट आने के आसार हैं। इससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।

महाराष्ट्र सरकार के नासिक और अन्य जिलों में जमाखोरों पर छापेमारी से इस महीने अब तक प्याज के दाम करीब 15 फीसदी कम हुए हैं। महाराष्ट्र प्याज के उत्पादन और कारोबार का प्रमुख केंद्र है। इसके साथ ही केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने 28 अगस्त से प्याज का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) बढ़ाकर काफी ऊंचा 700 डॉलर प्रति टन कर दिया है, जो श्रीलंका और पश्चिम एशिया सहित आयातक देशों की वर्तमान बाजार कीमत से करीब 300 डॉलर प्रति टन अधिक है।

इसका मकसद भारत से प्याज के निर्यात को हतोत्साहित करना था, ताकि कीमतों को नीचे लाने में मदद मिल सके। इसके अलावा सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसी एमएमटीसी को 10,000 टन प्याज के आयात की मंजूरी दी। इसके अलावा 1,000 टन टन प्याज वैश्विक निविदाओं से मंगाया गया है, जिसकी डिलिवरी अक्टूबर के अंत तक होने की संभावना है। कुल मिलाकर आयात के रुझान से कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली है।

बागवानी निर्यातक संघ के अध्यक्ष अजित शाह ने कहा, इन सब प्रयासों से प्याज की कीमतें थोड़ी नियंत्रित करने में मदद मिली है, लेकिन अभी यह ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। घरेलू स्रोतों से कम आपूर्ति और आयात में लंबी देरी से इस जिंस की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। अगले कुछ दिनों के दौरान कीमतों में 15 से 20 फीसदी कमी देखने को मिलेगी क्योंकि दक्षिण भारतीय मंडियों में नए सीजन के प्याज की बड़ी मात्रा में आवक होने लगी है। वास्तविक असर दो सप्ताह में दिखेगा, जब गुजरात में खरीफ फसलों की कटाई शुरू हो जाएगी।

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