mp1ज्ञात- अज्ञात शक्तियां , प्राकृतिक प्रकोपो अथवा असामान्य घटनाओं से मुक्त रखने कलेक्टर ने चौबीस खंबा मंदिर में देवी को मदिरा का भोग लगाकर नगर के देवताओं को पूजा.

नवरात्रि की महाअष्टमी को चौबीस खंबा मंदिर में देवी महामाया एवं देवी महालाया को मदिरा की धार लगाकर नगर पूजा करने की प्राचीन परंपरा है. यह परंपरा प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि में की जाती है लेकिन सिंहस्थ के कारण 12 वर्षो में एक बार चैत्र नवरात्रि में भी यह पूजा की जाती है. 36 वर्ष पूर्व 1980 के सिंहस्थ में चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी को इस पूजा की शुरूआत की गई थी.

उसी परंपरा को चौथे कुंभ में निभाते हुए कलेक्टर कविन्द्र कियावत ने सपत्नीक देवी दर्शन कर पूजा अर्चना की और देवी को मदिरा का भोग लगाया. मान्यता है कि इस पूजन से उज्जैन नगर हर प्रकोपो से मुक्त रहता है तथा सभी शक्तियां तृप्त होकर शांति, खुशहाली का वरदान देती है. यह पूजा रियासतकाल से चली आ रही है.यह पूजा स्टेट समय में तत्कालीन तहसीलदार द्वारा की जाती थी, अब इसे प्रशासन के मुखिया के तौर पर कलक्टर द्वारा की जाती है.

कोटवारों से लेकर तहसील का पूरा अमला करता है पूजन

कलेक्टर के बाद तहसील कार्यालय का शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों, कोटवारो, वसूली पटेल का दल ढोल धमाकों के साथ पूजा सामग्री एवं मदिरा लिए पदयात्रा करते हुए नगर पूजा करता है. प्रात: से शाम तक उज्जैन नगर में 40 से अधिक देवी और भैरव मंदिर में पूजा की गई.हाडी फोड भैरव पर पूजा का समापन हुआ. मदिरा की धार लगाकर नगर के मंदिरों में पूजा करने की परंपरा जरूर है लेकि साथ ही भजिये-पुरी भी अर्पित किए जाते हैं. माता को चुनरी चढ़ाई जाती है. रास्ते में पडऩे वाले मंदिरो में मदिरा की धार दूर रहती है. संबंधित मंदिरों में विराजित भगवान की पूजन परंपरा का पालन होता है.

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