नई दिल्ली,  दोपहिया टायर बाजार जबरदस्त प्रतिस्पर्धा की ओर बढ़ रहा है। इसे अपोलो जैसी नई कपंनी के आने और कई कंपनियों द्वारा आने की तैयारी के कारण अत्यधिक आपूर्ति से भी जूझना पड़ रहा है। हालांकि प्रमुख रूप से ट्रक-बस और कारों के टायरों पर ध्यान केंद्रित करने वाली कंपनियों द्वारा अब तक इस दोपहिया वर्ग के टायरों की उपेक्षा की जाती रही थी। तीस साल पुरानी और राजस्व के मामले में देश की दूसरी सबसे बड़ी टायर कंपनी अपोलो टायर्स ने हाल ही में दोपहिया टायर पेश किए हैं।

शुरुआत में कंपनी खुले बाजार में टायर बेचेगी, लेकिन कुछ दोपहिया कंपनियों के साथ उनकी मूल आपूर्तिकर्ता बनने के मद्देनजर भी इसकी बात चल रही है। टायरों का प्रयोग समान रूप से दोपहिया वाहन विनिर्माताओं और प्रतिस्थापन बाजार में बंटा हुआ है। अगर किसी कंपनी को इस क्षेत्र में गंभीरता से काम करना है तो उसे इन दोनों ही वर्गों में उतरने की जरूरत होती है।

कंपनी का दावा है कि इस क्षेत्र में देर से आने का प्रभाव इसके विस्तार की योजना पर नहींं पड़ेगा। अपोलो टायर्स के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नीरज कंवर ने कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे देरी से प्रवेश माना जाए। कंवर ने कहा कि कंपनी को प्रतिस्पर्धा का डर नहीं है। उन्होंने कहा कि अन्य वर्गों में अपना नेतृत्व देखते हुए मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि हम यहां अच्छा काम करेंगे। अपोलो ने अपने उत्पाद की कीमतें प्रमुख प्रतिस्पर्धियों के आस-पास ही रखी हुई हैं।
दोपहिया टायरों के वर्ग में एमआरएफ, सिएट, टीवीएस श्रीचक्र और मिशलन जैसी कंपनियों का वर्चस्व है। इनमें से कुछ कंपनियां भी अपनी क्षमता में विस्तार कर रही हैं, लेकिन नई आपूर्तिकर्ताओं के आने से उनके मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। आरपीजी ग्रुप की सीएट ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। टीवीएस श्रीचक्र के एक अधिकारी ने भी कहा कि कंपनी इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहती है। सिएट के पूर्व प्रबंध निदेशक पारस चौधरी ने कहा, च्पूर्व में कई कंपनियों ने दोपहिया टायरों में नहीं आने का निश्चिय किया था। लेकिन बढ़ते मुनाफे से कोई इसकी अनदेखी नहीं कर सकता।

उन्होंंने कहा कि नई कंपनियों के आने से इस श्रेणी में और ज्यादा प्रतिस्पर्धा हो जाएगी। चूंकि मौजूदा कंपनियां भी अपना विस्तार कर रही हैं, इसलिए हमें जल्द ही अत्यधिक आपूर्ति की स्थिति का सामना करना पड़े सकता है। लेकिन हमें इस बात का इंतजार करना होगा कि इससे कौन किस सीमा तक प्रभावित होता है। हालांकि भविष्य में दोपहिया उद्योग को मुश्किल दौर का सामना करना पड़ सकता है,

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