नियम की धज्जियां उड़ाने से नहीं चूक रहे

नवभारत न्यूज थांदला

वर्तमान समय में झाबुआ जिले में भ्रष्टाचार हर मर्यादा को पार किये हुए है। जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी मलाई खाने में इतने व्यस्त है कि किसी भी प्रकार की अतिरिक्त कार्यवाही तो दूर नियम की धज्जियां उडाने से भी नही चूक रहे है।

हाल ही में इसके ताजा उदाहरण जनता को प्राप्त सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत देखने को मिल रहे है। अधिकाँश विभाग जनता के हक को दबाने की हर संभव कोशिश कर रहे है। कभी सम्बन्धों की दुहाई तो कभी पैसों का रुतबा तो कभी अवैधानिक ताकत बता कर जनता की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। मामला जब तूल पकडता है तो कोरी जाँच के नाम पर पाखंड भी खूब होता है।

वर्तमान में एक मामला ऐसा ही सामने आया है। थांदला के एक शख्श ने सूचना के अधिकार का उपयोग करते हुए शैक्षणिक संस्था की कुछ जानकारी सम्बंधित संस्था के लोक सूचना अधिकारी से मांगी तब एक माह के बाद उस संस्था द्वारा यह पत्र आया कि उक्त संस्था में कोई लोक सूचना अधिकारी ही नही है।

इसलिए जानकारी नही दी जा सकती। अब इस बात के फैसले में भी उक्त संस्था को एक माह लग जाना उस संस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर इशारा ही करता है।

जब इसकी प्रथम अपील झाबुआ स्थित प्रथम अपील अधिकारी सहायक आयुक्त को की गई तो महाशय ने एक पत्र विभाग को देकर जानाकरी उपलब्ध करवाने के निर्देश जारी कर दिए। सहायक आयुक्त महोदय को जब सम्बंधित पत्र के विषय और समय नही दर्शाने के विषय में दूरभाष पर चर्चा की, तब उन्होंने कहा कि एक माह में आपको जानकारी मिल जायेगी अन्यथा कार्यवाही करेंगे।

यह जवाब उनकी लापरवाही या नियमो की अनभिज्ञता दर्शाता है या फिर दाल में काला लगता है यह देखने वाली बात है। क्योंकि प्रथम अपील के अंतर्गत अपील अधिकारी को सम्बंधित विभाग को पत्र जारी करते हुए जानकारी मांगनी थी की अपने सम्बंधित व्यक्ति के अधिकारों का हनन करते हुए तय समय सीमा में जानकारी क्यों प्रदान नही की एवं साथ ही दोनों ही पक्ष को विभाग में उपस्थित होकर जानकारी प्रदान और प्राप्त करने के निर्देश देने थे।

अपील अधिकारी को सुचना का अधिकार अधिनियम में वर्णित धारा का उल्लेख करते हुए नियत विलम्ब शुल्क और अर्थदंड से सम्बंधित विभाग के लोक सूचना अधिकारी को दण्डित करते हुए उक्त राशि भी सूचना का अधिकार के तहत जानकारी प्राप्त करता को दिलवानी थी। बहरहाल मामला गम्भीर है इस पूरी प्रक्रिया में समय तेजी से गुजर रहा है और जानकारी पर लीपापोती की गुंजाइश भी बन गई है।

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