एक लंबे समय तक सर्वाधिक मौतें महामारियों- मलेरिया, प्लेन, हैजा आदि से होती थी. यदा कदा प्राकृतिक आपदाओं बाढ़, भूकंप व अकाल पडऩे से होती थी. कालान्तर कभी विश्वयुद्ध छिड़ जाये तो वह भी भारी मौतों का कारण हो जाया करता था.

लेकिन अब मानव ने अपने भारी विनाश के लिए दूषित प्रदूषित जहरीला वायु प्रदूषण व जल प्रदूषण स्वनिर्माण कर अपने लिये आत्मघाती महामारी पैदा कर ली है. यह विकास, आवास व रहवास का भस्मासुर साबित हो रहा है जो समस्त मानव जाति का सामूहिक विनाश कर रहा है.

गरीब और अमीरी का एक अभिशाप कुपोषण भी है. जिससे धीरे-धीरे मौत आती है और अनके बीमारियों को भुगतने के बाद जाती है. गरीबी में जो भोजना मिलता है लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने के लिये जो पोषक तत्व मिलने चाहिए वह उस भोजन से नहीं मिल पाते. शरीर में कुपोषण से बीमारियों से मुकाबला करने की क्षमता नहीं होती.

अमीरी में जो ‘फास्ट फूड’ का चलन अब पूरा भोजन ही बन गया है. इसमें केवल स्वाद है पोषक तत्व नहीं है. यह भी कुपोषण है क्योंकि इससे भी पेट तो भर जाता है पर शरीर को स्वस्थ रखने के लिये पोषक तत्व नहीं मिलते और इसके कारण भी अनेक बीमारियां शरीर को घेर लेती हैं. पोषण का केवल एक ही अर्थ होता है कि शरीर को पोषक तत्व मिले.

धर्म के नाम पर दिवाली पर पटाखे से वायु प्रदूषण और मूर्ति विसर्जन से जल प्रदूषण धर्म के नाम पर अधर्म हो रहा है. साल 2015 में भारत में करीब 25 लाख लोगों की प्रदूषणजनित बीमरियों की वजह से मौत हुई, जो दुनिया भर में हुई प्रदूषण मौतों से कहीं ज्यादा है. इसमें मुख्य कारण अस्वस्थ हवा और अशुद्ध
पानी है.

इसके अलावा में दुनिया में इस समय अरब राष्टï्रों में सीरिया में युद्ध की स्थिति चल रही है और आतंकवादी हरकतों में भी काफी मौतें होती जा रही हैं. इसी अवधि में 2015 में सारी दुनिया में प्रदूषण से कुल 90 लाख से लेकर करोड़ लोग प्रदूषण की वजह से मरे हैं.

इसमें से सबसे ज्यादा 65 लाख लोग दूषित-जहरीली हवा में सांस लेने से मरे हैं और 18 लाख लोग अशुद्ध पानी से मरे हैं. बड़ी आबादी वाले देशों में भारत में 25 लाख और चीन में 18 लाख लोग प्रदूषण से मरे हैं. वहीं छोटी आबादी वाले देशों पाकिस्तान, बंगलादेश, नार्थ कोरिया, साऊथ सूडान में अकाल मृत्यु प्रदूषण से ही ज्यादा मौतें हो रही हैं.

सन् 2015 से समय से पूर्व हर 6 मौत में एक मौत प्रदूषण की वजह से हो रही है. प्रदूषितजनित बीमारियों पर हर साल 5 अरब डालर खर्च हो रहा है जो विश्व अर्थ-व्यवस्था का 6.2 प्रतिशत है.

अब दुनिया उस दौर में आ गयी है जब मौतों का सबसे बड़ा कारण प्रदूषण है. भारत के लिये यह निश्चित गंभीर चेतावनी है कि यहां प्रदूषण से सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं. श्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छता अभियान इस दिशा में उठाया गया एक बहुत बड़ा कदम है. और इसको शीघ्र सफल बनाने मेें हम सबका हित, स्वास्थ्य व जीवन निर्भर है.

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली में जो पटाखों की बिक्री पर रोक लगायी थी यह इस दिशा में जनहति का बहुत बड़ा कदम है. अब जनता को स्वयं की जनहित और आत्महित में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार ही व्यक्ति को यह फैसला कर लेना चाहिए कि वह दिवाली पर पटाखे और त्योहारों में मूर्ति विसर्जन नहीं करेगा.

 

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