फल भी बिकेंगे

भोपाल,

मध्यप्रदेश में इजराइल के सहयोग से फूलों की खेती और सिट्रस फ्रूट (खट्टे फल) के लिए दो उत्कृष्टता केंद्र खोलने के प्रस्ताव केंद्र सरकार की हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं.

इजराइल के काउंसल जनरल याकोव फिंकेलस्टीन ने आज यहां मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि फूलों की खेती के लिए सीहोर और सिट्रस फ्रूट के लिए शाजापुर में उत्कृष्टता केंद्र खोलना प्रस्तावित है. फिंकेलस्टीन यहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सौजन्य भेंट करने आए थे.

उन्होंने कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन और मुख्य सचिव बी पी सिंह से भी मुलाकात की. उन्होंने बताया कि भारत और इजराइल पहले से ही देश में 26 उत्कृष्टता केंद्र चला रहे हैं. इन गैर व्यवसायिक केंद्रों का उद्देश्य तकनीकी ज्ञान और खेती के बेहतर तरीकों को साझा करना है. इसमें राज्य और केंद्र सरकार जमीन और इजराइल तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराती है.

फिंकेलस्टीन ने चौहान और बिसेन को इजराइल के भ्रमण और तेल अवीव में 8 से 10 मई तक होने वाली 20वीं अंतरराष्ट्रीय कृषि प्रदर्शनी एग्रीटेक-2018 में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है. उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में इजराइल में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए उठाए गए नवाचारों के बारे में जानकारी दी जाएगी. उन्होंने कहा कि भारत और इजराइल सिंचाई, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आतंकवाद जैसे क्षेत्रों में एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री को इजराईल आने का दिया आमंत्रण

काउंसल जनरल ऑफ इजराईल याकोव फिन्केलस्टीन ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इजराईल आने और 20वीं अंतर्राष्ट्रीय कृषि प्रदर्शनी एग्रीटेक 2018 में शामिल होने का आमंत्रण दिया. मुख्यमंत्री को याकोव ने बताया कि प्रदर्शनी का आयोजन 8 से 10 मई 2018 तक ट्रेड फेयर एण्ड कन्वेंशन सेंटर, तेल अवीव में किया गया है. प्रदर्शनी में इजराईल में हुये प्रभावी कृषि उत्पादन के अभिनव प्रयासों की जानकारी मिलेगी. भेंट के मौके पर मुख्य सचिव बी.पी. सिंह भी मौजूद थे.

भावांतर योजना का केन्द्रांश शीघ्र जारी करने की माँग

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की. चौहान ने मुलाकात के दौरान मध्यप्रदेश में किसानों को उनके उत्पाद का उचित दाम दिलाने के लिए चलायी जा रही भावांतर भुगतान योजना के बारे में विस्तार से चर्चा की.

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय वित्त मंत्री को बताया कि प्रदेश में बम्पर कृषि उत्पादन के कारण उत्पादों की कीमत नीचे गिर गयी हैं. इससे किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने खरीफ फसलों के लिए भावांतर भुगतान योजना शुरू की गयी थी.