प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष राजन ने ई-वेस्ट प्रबंधन कार्यशाला का किया शुभारंभ

  • ई-वेस्ट प्रबंधन के लिये बनेगी सलाहकार समिति

भोपाल,

प्रदेश में ई-वेस्ट प्रबंधन के लिये विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थाओं, गैर-सरकारी एवं प्रशासनिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों की राज्य-स्तरीय सलाहकार समिति गठित की जायेगी.

समिति समय-समय पर प्रदेश में ई-वेस्ट प्रबंधन के लिये मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और शासन को सलाह देगी. प्रमुख सचिव एवं म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष अनुपम राजन ने यह जानकारी सोमवार को एप्को में बोर्ड द्वारा ई-वेस्ट प्रबंधन पर आयोजित कार्यशाला में दी.

कार्यशाला में प्रदेश के प्रमुख शिक्षण संस्थान, बैंक, शासकीय विभाग एवं उद्योगों के प्रतिनिधि शामिल हुए. जाने-माने ई-वेस्ट विशेषज्ञों ने ई-वेस्ट प्रबंधन, देश और प्रदेश में लागू अधिनियमों और नियमों की जानकारी दी.

सदस्य सचिव ए.ए. मिश्रा ने कहा कि मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड देश में ई-वेस्ट सर्वेक्षण कराने वाला देश का पहला बोर्ड है. मिश्रा ने प्रतिभागियों को प्रदेश में पॉलिथिन कैरी-बैग प्रतिबंध और देश एवं प्रदेश के विभिन्न नियम-अधिनियम की जानकारी दी.

प्रतिभागियों से कहा गया कि प्रदेश में यदि कोई कैरी बैग बनाता हुआ मिले, तो उसकी सूचना तत्काल बोर्ड को दें, ताकि उसके विरुद्ध कार्यवाही की जा सके. प्रदेश में प्लास्टिक कैरी बैग पर प्रतिबंध है, पैकेजिंग सामग्री पर नहीं. यदि सामान चारों तरफ से सील है, तो कैरी बैग की श्रेणी में नहीं आयेगा. यदि तीन तरफ से सील है, तो कैरी-बैग की श्रेणी में होने के कारण प्रतिबंध का उल्लंघन माना जायेगा.

बोर्ड के पूर्व निदेशक डॉ. डी.डी. वासु ने देश में ई-वेस्ट संबंधित कानून और नियमों की जानकारी, विशेषज्ञ अमित जैन ने देश में ई-वेस्ट प्रबंधन की स्थिति और प्रदेश की ई-वेस्ट रि-साइक्लीनिंग इकाई के प्रमुख डॉ. फजल हुसैन ने पर्यावरण मित्र ई-वेस्ट प्रबंधन के लिये उपलब्ध तकनीक और एच.के. शर्मा ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2016 के अंतर्गत प्लास्टिक उत्पादक और ब्रॉण्ड ओनर्स पर लागू ईपीआर के संबंध में जानकारी दी. पर्यावरण संचालक ने आभार प्रकट किया.

चिंता की जरूरत

राजन ने कहा कि हमें अभी से ही ई-वेस्ट प्रबंधन की चिंता करनी होगी, ताकि ई-वेस्ट उत्पादक शहर को होने वाली चुनौतियों का सामना न करना पड़े. उन्होंने कहा कि अत्यधिक जनसंख्या होने के कारण भारत विश्व के 5 प्रमुख ई-वेस्ट उत्पादक देशों में शामिल है.

कम्प्यूटर उपकरणों से लगभग 70 प्रतिशत, दूरसंचार उपकरणों से 12, चिकित्सा उपकरणों से 8 और अन्य विद्युत उपकरणों से लगभग 7 प्रतिशत, देश के शासकीय, निजी क्षेत्र, प्रमुख निजी कम्पनियों से 75 और घरेलू उपयोग से लगभग 16 प्रतिशत ई-वेस्ट उत्पन्न होता है. देश में मुम्बई सबसे ब?ा ई-वेस्ट उत्पादक शहर है.

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