मध्यप्रदेश की लोकसभा व विधानसभाओं की वोटर लिस्ट में साढ़े सात लाख ऐसे मतदाता पाये जाना जो अब जा चुके हैं, मृत हो गये या फर्जी नाम हैं बहुत ही गंभीर मामला है.

स्वयं भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ओ.पी. रावत ने भी उनके इंदौर-भोपाल प्रवास के दौरान यह माना कि भूल हुई है और वोटर लिस्टों को शुद्ध व ठीक किया जा रहा है. राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी सलीना सिंह ने भी आश्वस्त किया है सभी कलेक्टरों को निर्देश दिये जा चुके हैं कि मतदाता सूचियों को फौरन ठीक किया जाए और मृत या चले गये लोगों के नाम हटाये जाएं.

अभी हाल ही में मध्यप्रदेश, कोलारस व मुंगावली में विधानसभाओं के उपचुनावों में भी कांग्रेस ने मतदाता सूचियों में फर्जी वोटरों के होने का मामला उठाया था. उस समय भी यह पाया गया कि कुछ फर्जी वोटर थे और उसे उसी समय ठीक किया गया.

श्री रावत ने भी आश्वस्त किया है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के आदेश दे दिये गये हैं. इस वर्ष होने जा रहे विधानसभा चुनावों को हर हालत में निष्पक्ष रखा जायेगा.

लोकसभा व विधानसभाओं के एक साथ चुनाव कराने पर श्री रावत ने कहा कि इसके लिये कानून में बदलाव करना होगा. चुनाव आयोग ने अपनी राय केंद्र सरकार को भेज दी है. अभी तक कानून में बदलाव नहीं किया गया है और अब लोकसभा चुनाव में समय भी कम बचा है इसलिए इस बार ही लोकसभा व विधानसभाओं के एक साथ चुनाव होने की संभावना नहीं है.

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