पद्मावत पर राजस्थान, मध्य प्रदेश सरकार की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रही सरकार

पद्मावत फिल्म के प्रदर्शन पर रोक की याचिका खारिज होने के बाद शिवराज सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली है. प्रदेश के कानून मंत्री रामपाल सिंह ने कहा है कि कानून विभाग के अफसर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी.

उधर, याचिका सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जबलपुर में कहा कि वह कोर्ट के फैसले का अध्ययन करके ही कोई फैसला लेंगे. इससे पहले उन्होंने भोपाल में राजभवन में कहा था कि यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है. इससे एक वर्ग की भावनाएं जुड़ी हुई हैं.

इससे पूर्व भोपाल में सिनेमा घर संचालकों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की मुलाकात नहीं हो पाई. सिनेमाघर संचालक पद्मावत फिल्म को लेकर असमंजस की स्थिति में है. इसी संबंध में वह सीएम मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन सीएम राजभवन से सीधे जबलपुर निकल गए.

फिल्म पद्मावत की टीम के लिए मंगलवार का दिन एक और राहत लेकर आया. सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार की फिल्म पर रोक लगाने के लिए दायर पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए अपने आदेश में कोई बदलाव नहीं किया.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सभी राज्यों को सर्वोच्च अदालत के फैसले का सम्मान करना चाहिए और इसका पालन कराना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है. शीर्ष अदालत ने फिल्म के 25 जनवरी को देश भर में इसे प्रदर्शित किए जाने का रास्ता साफ कर दिया है.

राजस्थान सरकार का पक्ष रख रहे अडिशनल सलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हम कोर्ट से फिल्म पद्मावत पर रोक लगाने के लिए नहीं सिर्फ आदेश में कुछ बदलाव की अनुमति देने की मांग कर रहे हैं. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा, राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि अपने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बहाल करें.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए तीखी टिप्पणी की. तीन जजों की बेंच ने कहा कि राज्यों ने यह बिना मतलब की समस्या खुद पैदा की है और इसके लिए वही जिम्मेदार हैं. बता दें कि दोनों राज्य सरकारों ने फिल्म पद्मावत के प्रदर्शन की अनुमति देने के उसके 18 जनवरी के आदेश को वापस लेने की मांग की थी.

अहमदाबाद के 3 मॉल में तोडफ़ोड़, आगजनी

अहमदाबाद. फिल्म के खिलाफ कुछ संगठन के लोगों ने हिंसक प्रदर्शन करते हुए तीन मॉल्स में आगजनी की. हिमालयन मॉल में उपद्रवियों ने न सिर्फ तोडफ़ोड़ की बल्कि बाहर खड़ी गाडिय़ों को भी आग के हवाले कर दिया. हिंसक प्रदर्शन बढ़ता देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा.

टीवी रिपोट्र्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को खदेडऩे के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी. गुजरात के मल्टिप्लेक्सों ने पद्मावत फिल्म को न दिखाने का ऐलान किया था, फिर भी तोडफ़ोड़ की गई.

जायसी के गांव वालों ने मांगी कमाई में हिस्सेदारी

अमेठी. फिल्म के साथ एक और मामला जुड़ गया है. दरअसल, पद्मावत के रचयिता मलिक मोहम्मद जायसी के गांव अमेठी (उत्तर प्रदेश) में लोगों ने फिल्म से होने वाली कमाई के लाभ में हिस्सेदारी की मांग की है. मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक, फिल्म से होने वाली कमाई में हिस्सेदारी की मांग इसलिए की गई है, जिससे मलिक मोहम्मद जायसी के जन्मस्थान और रिसर्च इंस्टिट्यूट का विकास कार्य कराया जा सके.

बिहार में फिल्म की ऑनलाइन बुकिंग रद्द

पटना में करणी सेना के कार्यकर्ताओं के विरोध और धमकी के मद्देनजर सिनेमाघरों ने फिल्म की ऑनलाइन बुकिंग रद्द कर दी है. जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया, करणी सेना के डर से सिनेपोलिस ने न सिर्फ पद्मावत की बुकिंग बंद कर दी बल्कि करणी सेना के कार्यकर्ताओं द्वारा कर्मचारियों को धमकाने के बाद हो चुकी 50 बुकिंग रद्द भी कर दीं.

वहीं 3 अन्य सिनेमाघर, जो विवादित फिल्म को प्रदर्शित करने के लिए तैयार हैं, उन्होंने अब तक लोगों को संजय लीला भंसाली द्वारा निर्देशित फिल्म की अडवांस बुकिंग के बारे में सूचित नहीं किया है.

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