मुंबई,   खुले बाजार में अत्यधिक छूट ने सोने के आयातकों को निराश कर दिया है। देश में फरवरी के पूर्वार्ध में सिर्फ 15 टन सोने का आयात किए जाने का अनुमान है। कल तक बाजार भाव 32.5 डॉलर प्रति औंस या आयात की लागत पर करीब 700 रुपये प्रति 10 ग्राम की छूट पर बोले जा रहे थे। इसने भी आयात की राह में मुश्किल पैदा की है। दिसंबर-जनवरी में जब सोने की कीमतें कम थीं, उस वक्त माल का आयात करने वाले व्यापारियों द्वारा बिकवाली करने की वजह से छूट दी जा रही थी।

सोना खरीदारी के लिए जनवरी को फीका मानने के बावजूद मूल्य के संबंध में इस पीली धातु के आयात में उल्लेखनीय उछाल आई थी। सोने के आयात में 85.2 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ और यह 290 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया जोकि पिछले साल के 160 करोड़ डॉलर से ज्यादा था। हालांकि दिसंबर से यह आयात काफी कम है। ऐसा इसलिए है क्योंकि व्यापारी माल-सूची दुरूस्त कर रहे थे और हिंदू कैलेंडर के हिसाब से जनवरी का पूर्वार्ध अशुभ था।

बाजार को बजट में आयात शुल्क में दो प्रतिशत की कटौती का अनुमान है, नतीजतन फरवरी में अब तक आयात में तेज गिरावट आई है। उद्योग के विशेषज्ञ पूर्वार्ध में सिर्फ 15 टन के आस-पास आयात का अनुमान लगा रहे हैं। उनका कहना है कि 1200 डॉलर प्रति औंस से ऊंची कीमतों और शुल्क में कटौती किए जाने की आशंका के बीच बाजार में चल रही करीब 700 रुपये प्रति 10 ग्राम या 32 डॉलर प्रति औंस की भारी छूट ने आयात को असाध्य कर दिया है क्योंकि छूट की वजह से बैंक इसकी लागत नहीं समझ पाएंगे।

सराफा उद्योग अपरिष्कृत सोने के बढ़ते आयात को लेकर चिंतित है, खासतौर पर कुछ आपूर्तिकर्ताओं द्वारा सोना-चांदी की शोधशालाओं के संबंध में, जहां हाल में धनशोधन और गलत-घोषणा का मामला सामने आ चुका है। हालांकि इन मामलों में आगे और छानबीन चल रही है, लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अब केवाईसी (नो योर काउंटरपार्टी) पर जोर देने का समय आ चुका है।ऐसा इसलिए है क्योंकि जहां भी शोधशालाएं सीधे स्रोत से नहीं, बल्कि आपूर्तिकर्ताओं से अपरिष्कृत सोने का आयात कर रहे हैं, वहां विवादित सोने या गैर-कानूनी रूप से उत्पादित अपरिष्कृत सोने या राष्टï्रविरोधियों के स्वामित्व वाली खानों के मुद्दे उठते हैं ।

 

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