भारत सरकार का एक देशव्यापी संगठन है. एफ.एस.एस.ए.आई. (फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉेरिटी आफ इंडिया) जिसका कर्तव्य व दायित्व ही यह है कि देश में आहार की सुरक्षा व मानक तय करे जिससे लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित किया जाए. मेगी कांड से यह भी जाहिर व साबित हो गया कि यह संगठन अपने कर्तव्यों व दायित्वों के निर्वहन में पूरी तरह असफल रहा और देश के लोगों पर जहरीले खाद्य पदार्थ बहुराष्टï्रीय व राष्टï्रीय कंपनियों द्वारा अनेक वर्षों से लोगों को खुले आम सघन विज्ञापनबाजी से बेचे जाते रहे.

इस मामले को उत्तरप्रदेश सरकार के बाराबंकी जिला के खाद्य विभाग के अधिकारियों ने मेगी के सेम्पल लिये और उनमें शरीर के लिये घातक सीसा की मात्रा मानक से बहुत ज्यादा थी. उसके बाद ही न सिर्फ देश बल्कि दुनिया भर में स्विट्जरलैंड की बहुराष्टï्रीय आहार कंपनी नेस्ले के उत्पादों के विरुद्ध आपत्तियां व जांचों का ज्वार आ गया. बाराबंकी जांच सही पायी गयी और ‘मेगीÓ पर भारत के साथ-साथ दुनिया भर में प्रतिबंध लग रहे है.
जब सब हो गया तब भारत सरकार का संस्थान एफ.एस.एस.ए.आई बड़ा ‘तीर तमन्चाÓ बनके सामने आया. सात बड़ी कंपनियों को 32 ब्रांड्स की जांच कराने आदेश दिये. इनकी बिक्री पर रोक लगाई. साथ ही 3 नामी गिरामी कम्पनी के सोफ्ट व एनर्जी ड्रिंक पर भी रोक लगाई.

इसके अलावा बाजारों में ‘चाइना बाजारÓ के नाम से घटिया माल पाट दिया गया है. अब उन मालों की क्वालिटी की भी जांच होगी.
सवाल यह है कि इतने वर्षों से मेगी जैसे अन्य कई आहार, बेबी फूड, एनर्जी फूड बाजारों में खूब बिकते जा रहे थे. तब भारत सरकार की फूड अथॉरिटी कैसे बिलकुल निष्क्रिय पड़ी रही और लोगों के स्वास्थ्य के साथ इतना घातक हमला होता रहा.

इस बात की किसी जज से न्यायिक जांच कराई जाए कि जब इतने बड़े पैमाने पर घातक आहार बेचे जा रहे थे तब भारत सरकार की फूड अथारिटी उसे पकडऩे में क्यों पूरी तरह व बुरी तरह असफल रही.

इसने अभी कई कम्पनियों के आहार व पेय पदार्थों की जांच के आदेश दिये हैं. सरकार को इस फूड अथॉरिटी की खुद की जांच के लिए भी आदेश तुरंत जारी करना चाहिए जो अफसर भी दायित्वहीन और कर्तव्य से विमुख पाए जाएं उन्हें बर्खास्त व दंडित किया जाए.

सरकार की ऐसी अथॉरिटी किस काम की जो केवल भारत सरकार का रुतबा पाकर निकम्मी बैठी रहे और लोगों का अहित हो जाए.

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