मध्यप्रदेश के कई राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्यमार्ग सड़कों को फोरलेन बनाने का निर्णय हो गया है. यह सड़कें पूरे साल यथावत ठीक रहे और बरसात में टूटे या उखड़े नहीं इसलिए यह भी व्यवस्था होनी ही चाहिए कि उनके रखरखाव की स्थाई व्यवस्था रहे. अभी तक यह होता आ रहा है हर बरसात में राष्ट्रीय राजमार्ग व राज्य की बड़ी सड़कें टूट जाती हैं.

बरसात के 3-5 महीने टूट-फूट और अगले 2-3 महीने मरम्मत में लग जाते है. इस तरह लगभग आधा साल हर साल लोगों और ट्रक ट्रांसपोर्ट को इन सड़कों को भुगतना पड़ता है.

इस समय भारत माता सड़क योजना के तहत भोपाल-सलामतपुर-सांची-विदिशा व सागर रोड को 187 किलोमीटर की लम्बाई में फोरलेन बनाया जायेगा. राष्ट्रीय राजमार्ग 75 के विस्तार के तहत इस पर 23 किलोमीटर लंबी सुरंग बनायी जायेगी यह राष्ट्रीय राजमार्ग ग्वालियर को झांसी से
जोड़ता है.

राष्ट्रीय राजमार्ग 12 जो राजधानी भोपाल से होता हुआ जबलपुर तक जाता है उस पर भोपाल-गौहरगंज और जबलपुर से सिंदूर तक काम जल्दी ही शुरू होने जा रहा है. इसी तरह औबेदुल्लागंज से बैतूल तक 69 राष्ट्रीय राजमार्ग का सेक्शन भी फोरलेन बन रहा है.

राष्ट्रीय राजमार्ग 12 भोपाल से ब्यावरा तक का भी फोर लेन बन रहा है. इसी तरह रीवा-जबलपुर और इंदौर-एटिलाबाद, उज्जैन व झालावाड़ मार्ग भी फोरलेन बनेगा. चम्बल एक्सप्रेस वे की योजना पर केंद्र सरकार की अनुमति मांगी गयी है.

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