यह आंकलन सभी कर रहे हैं कि अभी असम के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की एकाएक भारी विजय इसलिये हुई कि उसने बंगलादेशियों के मुद्दे को चुनाव में अहम मुद्दा बनाया. उसने वादा किया कि यदि वह सत्ता में आयी तो असम की बंगलादेश से सीमा सील कर दी जायेगी और बंगलादेशियों को वापस उनके देश भेजा जायेगा.

यह असम की बहुत दुखती रंग है जिस पर भारतीय जनता पार्टी ने हाथ रख दिया और जनता ने भारी बहुमत से जिता दिया.

असम के लिये बंगलादेशी साम्प्रदायिकता की हिन्दूृ-मुसलमान समस्या नहीं है, लेकिन इस समस्या में वहां मुस्लिम भावना एक बड़ा कारण बनी हुई है. 1947 में भारत विभाजन के समय बंगाल व पंजाब राज्यों का मुसलमान आबादी के हिसाब से विभाजन हुआ. वहीं असम में केवल एक ही जिला सिल्हट मुस्लिम बाहुल्य था वहां इस बात के लिये जनमत संग्रह हुआ कि वह भारत या पाकिस्तान में कहां रहना चाहता है. उस जिले के लोग भाषा के आधार पर तो असमिया थे लेकिन धर्म के आधार पर मुसलमान थे.

उन्होंने भाषा के ऊपर धर्म के आधार पर बंगला भाषी उस समय के पूर्वी पाकिस्तान (अब बंगालदेश) जाना जनमत में भारी बहुमत से तय किया और असम का केवल सिल्हट जिला ही पाकिस्तान में गया. तब से असम भाषी लोग उनसे साम्प्रदायिकता के आधार पर नहीं बल्कि भाषायी आधार पर बदजन हो गये और उनसे घृणा करते हैं. लेकिन जब बंगालदेश पाकिस्तान से विद्रोह स्वतंत्र राष्ट्र बना तो उसका आधार धर्म इस्लाम नहीं बल्कि बंगला भाषा था. ऐसे में सिल्हट के असमिया लोग वहां भी गैर समझे जाने लगे.

इसी तरह 1947 के दंगों से प्रभावित होकर बिहार के मुसलमान पूर्वी पाकिस्तान ही गये और वे वहां आज तक बिहारी कहलाते हैं और बंगलादेश के लोग उन्हें गैर समझते हैं और अपने यहां से खदेड़ रहे हैं. बंगलादेश युद्ध के समय बहुत से लोग वहां से भारत में शरणार्थी बन कर आ गये थे. उनमें से बहुत लोग आज तक वहां लौटकर नहीं गये क्योंकि पूर्वी पाकिस्तान भारत के पश्चिम बंगाल से सम्पन्नता सुख सुविधा में काफी पीछे था. वे लोग पश्चिम बंगाल की समस्या बने
हुए हैं.

इसी तरह सिल्हट के असमिया मुसलमान भागकर असम में वापस आ रहे हैं और असम राज्य के भारतीय मुसलमान उन्हें अपने साथ मिलाकर व बसाकर असमिया बता रहे है. विभाजन के समय असम में केवल तीन प्रतिशत मुसलमान थे. आज जनसंख्या का 31 प्रतिशत हो गये. इससे असम की जनता त्रस्त है और चाहती है कि इन्हें वोटर लिस्ट से असम राज्य से निकाला जाये. इन पर वहां बड़े हिंसक आंदोलन हुए और कई बार इस बात पर चुनाव नहीं होने दिये कि पहले इन बंगलादेशियोंं को निकाला जाए. क्योंकि विभाजन के वक्त येे भाषा से विमुख होकर धर्म के आधार पर पाकिस्तान चले गये थे और भाषा के आधार वापस आ रहे है.

अब मोदी सरकार ने घोषणा कर दी है कि भारत में बंगलादेश सीमा सील होगी. उन बंगलादेशियों को वापस भेजा जायेगा. बंगलादेश की सरकार भी इसमें सहयोग कर रही है. बंगलादेशी असम और पूरे भारत की एक बहुत बड़ी समस्या बन चुके है. पूरे भारत में फैले है और इस्लाम के नाम पर आतंकी की हिमायत में पाये गये है. असम में यह समस्या हल हो गयी तो पश्चिम बंगाल की जनता भी इसी प्रश्न पर भारतीय जनता पार्टी को वहां भी सत्ता में ला सकती है.

बंगला देशी न सिर्फ असम व बल्कि पूरे भारत की बहुत बड़ी सुरक्षा समस्या भी बन गये है. इसका हल हो जाने से असम निश्चित ही इन विदेशियों के शिकंजे से मुक्त हो जायेगा बल्कि पूरे भारत को राहत मिलेगी. असम के सामने ये बंगलादेशी घुसपैठिये उनके जीवन मरण का प्रश्न बने हुए है. अब वे बहुत बड़ी राहत महसूस कर रहे है जैसे असम को बचा लिया गया हो.

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