• सडक़ों पर पसरा रहा सन्नाटा
  • फ्लैग मार्च से हालात सामान्य
  • 3 थाना क्षेत्रों में कफ्र्यू जारी

नवभारत न्यूज ग्वालियर,

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में भारत बंद में हुई हिंसा और आगजनी मंगलवार को पूरी तरह जिंदगी को डरा गई. सडक़ों पर सन्नाटे में अजीब सी खामोशी रही. स्कूल कॉलेज बंद होने से लोग घरों में सहमे रहे.

यहां तक कि पुलिस के जवानों का फ्लैग मार्च क्षेत्रों में हालात सामान्य करने के लिए दिन भर होता रहा. दलित संगठनों ने 2 अप्रैल को भारतबंद बुलाया और इस बंद को बुलंद करने में कई जिंदगी दुनिया से विदा हो गई. यहां तक कि सैकड़ों परिवार तबाह हो गये. उनके रोजी-रोटी के साधन छिन गए. रोजगार न मिलने से घरों में चूल्हे नहीं जले.

लेकिन इस बंद को कामयाब करने निकले समर्थकों ने बिना किसी खौफ के अपना आतंक बरपाए रखा. आलम ये रहा कि ग्वालियर शहर में सोमवार रात से पुलिस प्रशासन ने 4 थाना क्षेत्रों में कफ्र्यू के साथ रैपिड एक्शन फोर्स की कंपनियों की तैनाती की जिसके बाद बंद समर्थक तो सडक़ों से गायब हो गए.

मगर आम जिंदगी ठहर सी गई. मंगलवार सुबह 7 से 8 बजे तक कफ्र्यू में 1 घंटे की ढील मिली. जिसमें लोगों ने दूध-सब्जी का इंतजाम किया लेकिन दुकानें नहीं खुली और सडक़ों पर सन्नाटा पसरा रहा.

कलेक्टर राहुल जैन, एसपी डॉ. आशिष वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दोपहर बाद तक शहर के हालातों पर निगरानी के लिए घूमते रहे और हर 1 घंटे बाद समीक्षा की गई. दोपहर 1 बजे प्रशासन ने महाराजपुरा थाना क्षेत्र से कफ्र्यू हटा लिया.

इसके साथ ही कलेक्टर राहुल जैन ने पुलिस के लाउड स्पीकरों से कॉलोनियों, बस्तियों में एलान कराया कि आपातकालीन परिस्थितियों में अगर किसी को अस्पताल या शहर से बाहर जाना है तो उन्हें पुलिस के वाहन सकुशल रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड तक पहुंचाएंगे.प्रशासन की इस पहल से भी लोगों के अंदर घुसा डर नहीं निकला सका और लोग अपने घरों में ही कैद रहे.

इसी बीच शहर के दूसरे कई स्थानों से भीड़ इकट्ठा होने और उपद्रव करने की सूचना मिलने के बाद पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर उन्हें खदेड़ा. हालांकि रात 8 बजे तक शहर में हालात काबू में रहे लेकिन सडक़ों पर सन्नाटे और सहमी हुई जिंदगी के बीच इन्हें सामान्य बनाने में अभी कितना वक्त लगेगा. ये आने वाला कल तय करेगा.

देर रात मृतकों के कर दिए अंतिम संस्कार

जिला प्रशासन ने भारत बंद में हिंसा के दौरान अपनी जाना गंवा बैठे दो युवक राकेश जाटव और दीपक जाटव का अंतिम संस्कार सोमवार देर रात उनके परिजनों की मौजूदगी में करा दिया जिससे किसी भी तरह की भीड़ इकट्ठी न हो सके और हालात सामान्य रह सकें.

कलेक्टर ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता राशि देने के आदेश पूर्व में ही जारी कर दिए. मृतकों के अंतिम संस्कार के साथ ही प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने मुरार, गोला का मंदिर क्षेत्र में अतिरिक्त जवानों की तैनाती रखी जिससे माहौल न बिगड़े.

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